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भारत रत्‍‌न मौलाना अबुल कलाम आजाद को उनके 130वें जन्मदिवस पर कॉंग्रेस भी उन्हे याद करना भूल गई। जामा मस्जिद के निकट स्थित उनके मजार पर सिर्फ गुलाम नबी आजाद ही आजाद ही पहुंचे। इस दौरान मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के कुलपति व मौलाना आजाद के वंशज फिरोज बख्त अहमद ने निराशा जताई।

उन्होने कहा, पिछले 30 वर्षो से मौलाना आजाद की मजार पर न तो कभी दिल्ली के कोई मुख्यमंत्री, न क्षेत्र के सासद और न ही कोई अन्य विशिष्ट मंत्रीगण आए। मजार वीरान और अस्वच्छ पड़ा रहता है। सालभर में केवल उनकी जन्मतिथि एवं पुण्यतिथि को ही सफाई देखने को मिलती है।

फिरोज बख्त ने ये भी बताया, 2013 में मौलाना आजाद पोर्टल की बुनियाद डाली गई थी, जिसमें उनके जीवन से संबंधित लगभग सभी भाषण, चित्र, पुस्तकें, चिट्ठियां मौजूद थीं, मगर इसकी फीस नहीं दिए जाने के कारण इसे बंद कर दिया गया। हालांकि आइसीसीआर की अध्यक्ष रिवा गांगुली ने कहा कि अब गोशा-ए-आजाद पुस्तकालय में उनकी सभी पुस्तकों एवं अन्य कार्य को डिजिटलाइज किया जाएगा।

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इस मौके पर गुलाम नबी आजाद ने कहा कि बहुत कम लोगों को पता है कि काग्रेस के सबसे कम आयु और सबसे अधिक समय तक अध्यक्ष रहने वाले व्यक्ति मौलाना अबुल कलाम आजाद ही थे। उनका जीवन साप्रदायिक सौहार्द, बढि़या शिक्षा व भारतीय अखंडता को बनाए रखने में व्यतीत हुआ। वह गंगा-यमुना तहजीब के पुजारी थे।

बता दें कि पंडित जवाहरलाल नेहरू की कैबिनेट में 1947 से 1958 तक मौलाना अबुल कलाम आजाद शिक्षा मंत्री रहे। 22 फरवरी, 1958 को हृदय आघात से उनका निधन हो गया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।
उन्होंने आईआईटी, आईआईएम और यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन) जैसे संस्थानों की स्थापना में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उनके योगदानों को देखते हुए 1992 में उनको भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके जन्मदिन को भारत में नैशनल एजुकेशन डे के तौर पर मनाया जाता है।
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