जानशीन मुफ्ती-ए-आजम हिंद मौलाना अख्तर रजा खां अजहरी मियां का हुआ निधन

9:38 pm Published by:-Hindi News
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बरेली। जानशीन मुफ्ती-ए-आजम हिंद मौलाना अख्तर रजा खां अजहरी मियां का आज निधन हो गया है। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर के साथ ही मुरीदों मे शोक की लहर है।

ताजुश्शरिया अजहरी मियां अहले सुन्नत वल जमात की एक बड़ी हस्ती है। भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर मे उनके लाखों की तादाद में मुरीद है। उनकी गिनती विश्वभर के प्रसिद्ध आलिमों में होती रही है।

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2011 में वे अमेरिका की जार्ज टाउन यूनिवर्सिटी के इस्लामिक क्रिश्चियन अंडरस्टेंडिंग सेंटर की ओर से किये जाने वाले सर्वे में 28वां स्थान पर आए। इसके अलावा जॉर्डन की रॉयल इस्लामी स्ट्रेजिक स्टडीज़ सेंटर के 2014-15 के सर्वे में उन्हें 22 वें स्थान पर रखा गया।

आज शाम 07: 45 बजे मिशन अस्पताल में ली आख़िरी साँस,  इन्तिक़ाल की ख़बर मिलते ही हज़ारों की तादाद में मुरीद मिशन अस्पताल पहुंचे।  तीन दिन पहले तबीयत ख़राब होने पर भर्ती कराया गया था। आलमे इस्लाम में अज़हरी मियाँ के करोड़ों मुरीद हैं। सन 1943 में खानदाने आला हज़रत में पैदा हुए थे। कुल 75 साल की उम्र में दुनिया से रुख़सत हुए अज़हरी मियाँ। अज़हरी मियाँ को ताजुस शरिया के ख़िताब से दुनिया में जाना जाता है।

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2 फरवरी 1943 को जन्मे अजहरी मियां बरलेवी आंदोलन के संस्थापक अहमद रजा खान के वंशज हैं। उन्होंने सन 2000 में बरेली में इस्लामिक स्टडीज जमीरूर रजा के नाम से एक इस्लामी धर्मशास्त्र केंद्र की स्थापना की थी।

उन्होने विज्ञान, धर्म और दर्शन सहित कई विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला पर कई किताबें लिखी हैं। अज़हरुल फतवा के खिताब से फतवा का संग्रह उनका विशाल कार्य है।

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उन्होंने कई अनुवाद भी किए। जिनमे अल-हक्कुल मोबेन दिफा कंजूल इमान, टी.वी.विडियो का शराई ऑपरेशन, मिरातुन नजदीयाह, तस्वीरों का शराई हुक्म (फोटोग्राफी), शराह हदीस ए नियत आसार ए कयामत आदि है।

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