मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि के स्वामित्व का हवाला देकर दायर की गई शाही ईदगाह मस्जिद हटाने की मांग वाली याचिका पर मथुरा जिला अदालत ने सुनवाई 10 दिसंबर तक टाल दी है।

श्री कृष्म जन्मभूमि की 13.37 एकड़ भूमि के स्वामित्व और शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग को लेकर अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री सहित कृष्ण भक्तों ने जिला जज की अदालत में याचिका दायर की हुई है। इसमें श्री कृष्ण जन्मभूमि सेवा संस्थान ,श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट, शाही ईदगाह मस्जिद , सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को पार्टी बनाया गया।

कोर्ट ने सभी को नोटिस जारी कर बुधवार को उपस्थित होने का आदेश दिया था। लेकिन श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की तरफ से कोर्ट में कोई उपस्थित नहीं हुआ। इससे पहले मथुरा कोर्ट ने इस मामले को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि 1991 के प्लेसेस ऑफ वर्शिप ऐक्ट के तहत सभी धर्मस्थलों की स्थिति 15 अगस्त 1947 वाली रखी जानी है इस कानून में सिर्फ अयोध्या मामले को अपवाद रखा गया था।

इसके अलावा पिछले साल 9 नवंबर को अयोध्या पर फैसला सुनाते हुए SC की पांच जजों की बेंच ने ऐसे मामलों में काशी मथुरा समेत देश में नई मुकदमेबाजी के लिए दरवाजा बंद कर दिया था।

अब इस मामले में मामले में अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा, माथुर चतुर्वेदी परिषद ,अखिल भारत हिंदू महासभा की तरफ से भी जिला जज की अदालत में पक्षकार बनने के लिए प्रार्थना पत्र दिए गए। हिंदू महासभा की अध्यक्ष ने मथुरा में गुरुवार को मीडियाकर्मियों के साथ बातचीत में बताया कि उनका संगठन हिंदुओं के पक्ष में याचिका करेगा। चौधरी ने बताया, ‘कृष्णजन्मभूमि के बगल में बना ईदगाह अवैध है। केवल इतना ही नहीं, हमारे एजेंडे में अभी काशी विश्वनाथ, तेजो महल भी है।

Loading...
विज्ञापन
अपने 2-3 वर्ष के शिशु के लिए अल्फाबेट, नंबर एंड्राइड गेम इनस्टॉल करें Kids Piano