जम्मू | हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता और मुस्लिम लीग के अध्यक्ष मसरत आलम को एक बार फिर स्थानीय अदालत ने जमानत दे दी है. मसरत आलम को पहले भी कई बार जमानत मिल चुकी है लेकिन सरकार उनको किसी न किसी आरोप में दोबारा गिरफ्तार करती रही है. इस बार भी ऐसे हालात नजर नही आते की पीडीपी-बीजेपी की सरकार , मसरत आलम को रिहा करने के मूड में है.

मसरत आलम 2010 से जेल में बंद है. साल 2010 में घाटी में हुए हिंसक प्रदर्शन के प्रदर्शन के बाद मसरत आलम को गिरफ्तार किया गया था. उस समय मसरत पर जन सुरक्षा कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था. पिछले छह साल से मसरत जेल में बंद है. हालांकि वो जेल से अन्दर बाहर होता रहा है क्योकि सूबे की सरकार मसरत को जमानत मिलते ही किसी दुसरे आरोप में गिरफ्तार करने का आदेश देती रही है.

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दरअसल सरकार को अंदेशा है की रिहाई के तुरंत बाद मसरत , घाटी में सरकार विरोधी प्रदर्शन को अपने हाथ में ले सकता है जिसकी वजह से घाटी के हालात एक बार फिर बिगड़ सकते है. हालांकि श्रीनगर के मजिस्ट्रेट की अदालत ने मसरत को रिहा करने के आदेश दे दिए है लेकिन अभी तक उसको रिहा नही किया गया है. दरअसल मसरत की रिहाई सरकार के लिए गले की फांस बन चूका है.

मसरत आलम को हुर्रियत नेता सैयद अहमद गिलानी का करीबी माना जाता है. मसरत पर अब तक 50 मामले दर्ज किये जा चुके है जबकि उस पर 35 से ज्यादा बार जन सुरक्षा अधिनियम लागु किया जा चूका है. 2010 में भी मसरत को जन सुरक्षा पर आये संकट को देखते हुए गिरफ्तार किया गया था. उस समय हुई हिंसा में करीब 120 लोग मारे गए थे. इसलिए इस बात की उम्मीद कम ही है की राज्य सरकार मसरत को रिहा करने की गलती करेगी.

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