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लखनऊ : रिहाई मंच ने आरोप लगाया है कि भोपाल में सिमी से जुड़े होने के आरोप में बंद मुस्लिम युवकों की फर्जी मुठभेड़ में हत्या के बाद भोपाल समेत पूरे देश में आतंकवाद के आरोपों में बंद मुसलमानों का जेल के अंदर उत्पीड़न किया जा रहा है। मंच ने सर्वोच्च न्यायालय से अपील की है कि वह जेलों में बंद इन आरोपियों की हालत का जायजा लेने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करे। मंच ने अल्पसंख्यक आयोग से भी जेलों का दौरा करने की मांग की है।

मंच के महासचिव राजीव यादव ने आरोप लगाया है कि भोपाल फर्जी मुठभेड़ के दोषी पुलिस अधिकारियों को सजा देने के बजाए भाजपा सरकार आतंकवाद के आरोप में बंद बाकी मुस्लिम आरोपियों का जेल में लगातार उत्पीड़न कर रही है। उनसे उनके कपड़े समेत बाकी रोजमर्रा के सामान तक छीन लिए गए हैं और ठंड के बावजूद उन्हें सिर्फ एक कम्बल दिया जा रहा है जबकि उससे पहले ठंड के मौसम में उन्हें 3 से 4 कम्बल दिए जाते थे।

रिहाई मंच महासचिव ने कहा है कि उन्हें भोपाल जेल में बंद फरहत और शराफत की मां सायरा बानो ने फोन करके बताया कि भोपाल फर्जी मुठभेड़ से पहले उन्हें 8 दिनों में दो बार अपने बेटे से 20-20 मिनट के लिए मुलाकात कराई जाती थी। लेकिन अब जेल मैन्यूअल के खिलाफ जाते हुए उन्हें 15 दिनों में सिर्फ 5 मिनट की मुलाकात कराई जा रही है। उन्हें जेल मैन्यूअल के खिलाफ जाते हुए 24 घंटे तक बंद रखा जा रहा है, यहां तक कि पानी के लिए भी उन्हें तरसा दिया जाता   है और परिजनांे को धमकी दी जाती है कि उनके बच्चों को वे लोग जब चाहे तब मरवा सकते हैं।

राजीव यादव ने कहा कि फरहत के खिलाफ पिछले 6 साल में 70 में से सिर्फ 14 गवाहों की गवाहियां ही हुई हैं जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुकदमें में कोई दम न होने के कारण जानबूझ कर उसे लम्बा खींचा जा रहा है। जिसके लिए कभी गवाहों का न उपलब्ध होना तो कभी वीडियो कैमरा खराब होने का बहाना बनाया जाता है।


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