manmohan-singh

नई दिल्ली | 8 नवम्बर को नोट बंदी लागू होने के बाद से यह फैसला विवादों में रहा है. कोई इस फैसले में आरबीआई की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहा है तो कोई इस फैसले के अमल पर. देश के पूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने नोट बंदी के फैसले को एक संगठित लूट बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की थी. खबर है की मनमोहन सिंह ने एक बार फिर नोट बंदी पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार वित्त सम्बन्धी संसदीय समिति की बैठक में मनमोहन सिंह ने नोट बंदी के फैसले में आरबीआई की स्वायता पर सवाल उठाया. मनमोहन सिंह ने आरबीआई से पुछा की क्या उनको नोट बंदी पर सोचने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था. इस बैठक में मनमोहन सिंह ने आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल की हाजरी पर भी जोर दिया.

पैनल के एक सदस्य के अनुसार मनमोहन सिंह ने कहा की चूँकि सरकार ने 7 नवम्बर को नोट बंदी का फैसला लिए और 8 नवम्बर को रिज़र्व बैंक बोर्ड ने इस पर अपना निर्णय लिया इसलिए जरुरी है की हम पहले सरकार का पक्ष सुने और बाद में रिज़र्व बैंक का. हम जानना चाहते है की रिज़र्व बैंक के पास नोट बंदी के फैसले पर सोचने के लिए पर्याप्त समय था या नही.

मनमोहन सिंह ने पैनेल को यह भी सुझाव दिया की जब उर्जित पटेल पैनल के सामने आये तब वहां कोई भी सरकारी अधिकारी मौजूद न हो. खबर है की उर्जित पटेल 18-19 जनवरी को पैनल के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे. वही खबर यह भी है की मनमोहन सिंह ने आरबीआई की स्वायता पर भी सवाल उठाये है. यही नही पैनल आरबीआई से यह भी जानना चाहेगा की वो लोगो को हो रही कैश की भारी किल्लत को हल करने के लिए क्या कदम उठा रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार इस बैठक में चार स्पेशलिस्ट को भी बुलाया गया. खबर है की चार में से तीन विशेषज्ञों ने नोट बंदी के खिलाफ अपना पक्ष रखा. विशेषज्ञों में अर्थशास्त्री राजीव कुमार और महेश व्यास, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एंड पॉलिसी की कविता राव और पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद् प्रणव सेन शामिल रहे.


शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

Loading...

कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें