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मध्य प्रदेश के मंदसौर में पिछले दिनों आठ वर्षीय बच्ची के साथ हुई दरिंदगी के मामले मे सबसे पहले जिस मुस्लिम समुदाय ने आरोपी के खिलाफ आवाज बुलंद की उसे ही अब बदनाम करने की घिनोनी साजिश रची जा रही है। ताकि बहुसंख्यक हिन्दू समाज को भड़का कर महोल खराब किया जा सके।

इस बात का खुलासा ऑल्ट न्यूज ने अपनी जांच में किया है। www.indiaflare.com वेबसाइट ने एक पोस्ट शेयर की है। जिसमे शीर्षक दिया गया कि ‘क़ुरान में दूसरे धर्म की लड़कियों से बलात्कार जायज़, इरफ़ान खान को रिहा करो।’ इस भड़काऊ शीर्षक वाली खबर को 1 जुलाई को पोस्ट किया गया था, जिसे अब तक 16,000 से ज्यादा बार शेयर किया जा चुका है।

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ऑल्ट न्यूज ने अपनी जांच में पाया कि इस खबर में मुस्लिम लोगों की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की गई है। इस खबरे में लगी तस्वीरों में रैली निकालते मुस्लिम लोग नजर आ रहे हैं, जिनके हाथ में नजर आ रही तख्ती पर ‘इरफ़ान को रिहा करो’ लिखा दिखाई देता है, वहीं पीछे कुछ तख्तियों पर ‘रिहा करो’ लिखा है। द वायर में छपी खबर के मुताबिक यह फोटो पूरी तरह से झूठी है।

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फोटोशॉप की गई तस्वीर की हकीकत ये है कि यह रैली आरोपी के पक्ष में नहीं बल्कि इस बलात्कार की घटना के बाद पीड़िता के समर्थन में निकाली गयी थी। लेकिन तस्वीर के साथ छेड़छाड़ कर इसे आरोपी के समर्थन मे दिखा दी गई। फोटोशॉप की गई तस्वीर मे लिखा है – ‘इरफ़ान को रिहा करो’  जबकि असली तस्वीर मे लिखा है – नहीं सहेंगे बेटी पर वार, बंद करो ये अत्याचार’ जिसे इंडियाफ्लेअर वेबसाइट पर ‘इरफ़ान को रिहा करो’ कर दिया गया है।

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इस लेख में यह दावा भी किया गया है कि इस मामले में आरोपी को फांसी दिलवाने के लिए कोई मुस्लिम सड़क पर नहीं उतरा लेकिन कुरान का हवाला देते हुए आरोपी के पक्ष में रैली निकाली। साथ ही पाठकों को चेताया भी कि वे इस रिपोर्ट के उलट मीडिया में चल रही किसी भी अन्य रिपोर्ट का विश्वास न करें क्योंकि वे झूठी हैं।

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इतना ही नहीं वेबसाइट के एक अन्य लेख में मध्य प्रदेश के कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी किया गया। दरअसल उन्होने बयान दिया था कि मंदसौर की बेटी के साथ हैवानियत झकझोरने वाली है। इस बर्बरतापूर्ण कृत्य की फाँसी के सिवाय कोई सज़ा हो ही नहीं सकती| सरकार की ज़िम्मेदारी बनती है की मामला फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाये और 15 दिन के भीतर सज़ा हो ये सुनिश्चित करें।

लेकिन वैबसाइट ने लिखा कि दोनों आरोपी बेक़सूर हैं और मामले की सीबीआई जांच करवाई जानी चाहिए।

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