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जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद की तलाश की मांग को लेकर बुधवार को मंडी हाउस से संसद मार्ग तक ‘जस्टिस फॉर नजीब’ मार्च निकाला गया. इस मार्च में नजीम के घर वालों समेत जेएनयू के सैकडों छात्रों ने भाग लिया.

जेएनयू स्टूडेंट यूनियन के आह्वान पर विरोध मार्च मंडी हाउस से शुरू हुआ, जिसमें समाजवादी पार्टी, आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएमआईएम) और जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकर्ता और सांसद शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए नफीस ने कहा, मैं नजीब का पता लगाने के लिए मेरे संघर्ष में शामिल होने के लिए आप सभी का शुक्रिया अदा करती हूं और नजीब का पता चलने तक मैं आप सभी का साथ चाहती हूं.

लोकसभा में बदायूं से सांसद सपा के धर्मेन्द्र यादव ने कहा कि उन्होंने सदन में कई बार इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की, लेकिन नोटबंदी के चलते संसद में जारी गतिरोध की वजह से वह यह मुद्दा नहीं उठा सके. एमआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सरकार को नजीब का पता लगाना होगा और दोषियों को सजा देनी होगी. एक मां पीड़ा में है. सरकार को उसकी आवाज सुनने और उसके बेटे का पता लगाने की जरूरत है.

अनवर अंसारी ने कहा कि नजीब की गुमशुदगी का मामला सिर्फ एक बच्चे का मामला नहीं है. यह घटना देश के लोकतंत्र के लिए खतरा है. संघ के विचारधारा  विश्वविध्यालय में आ गई है, इसलिए हमारा संघर्ष सिर्फ नजीब की वापसी तक के लिए नहीं है. उन्होंने कहा कि छात्र नजीब की गुमशुदगी में एबीवीपी का इंवॉल्मेंट है और उनको संघ की तरफ से शह मिल रही है. उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस और जेनयू प्रशासन भी उनका साथ दे रही है. ये फांसीवाद है. नजीब की अम्मी की लड़ाई में हम उसके साथ है.

जेएनयू छात्रसंध अध्यक्ष मोहित पांडेय ने कहा कि इससे पहले उमर खालिद के मामले को साम्प्रादायिक बनाने को कोशिश की गई थी और अब एवीबीपी इस मामले को भी कम्यूनल रंग देना चाहती है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने नजीब को पीटा उन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई. मोहित ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन प्रॉक्टर की पहली रिपोर्ट को मानकर चल रहा है, जिसमें कहा गया है कि नजीब के साथ कोई हिंसा नहीं हुआ था. जबकि दूसरे वाले रिपोर्ट में हमले की बात कही गई है जिसे विश्वविद्यालय मानने को तैयार ही नहीं है.


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