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अयोध्या मसले पर गोलमेज सम्मेलन में संबोधित करते हुए एमआईटी यूनिवर्सिटी के संस्थापक प्रो डॉ विश्वनाथ कराड। साथ हैं नागपुर विश्वविद्याय के पूर्व कुलपति एसएन पठान, स्वामी अग्निवेश, पूर्व सांसद आरिफ़ मुहम्मद ख़ाँ और राम जन्मभूमि न्यास के राम विलास वेदांति
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अयोध्या मसले पर गोलमेज सम्मेलन में संबोधित करते हुए एमआईटी यूनिवर्सिटी के संस्थापक प्रो डॉ विश्वनाथ कराड। साथ हैं नागपुर विश्वविद्याय के पूर्व कुलपति एसएन पठान, स्वामी अग्निवेश, पूर्व सांसद आरिफ़ मुहम्मद ख़ाँ और राम जन्मभूमि न्यास के राम विलास वेदांति

नई दिल्ली, 3 अक्तूबर नोटबंदी और जीएसटी के बाद भंवर में फंसी भारतीय जनता पार्टी और नरेन्द्र मोदी की कश्ती को निकालने के लिए राम मंदिर ही एक आस बची है। अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विवादित स्थल पर मानवता भवन के नाम पर राम मंदिर बनाने के लिए सभी पक्षों को राज़ी करने के लिए पुणे के विश्व शांति विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ विश्वनाथ कराड अचानक दिल्ली में नज़र आ रहे हैं और सभी पक्षों को राज़ी कर रहे हैं कि अयोध्या के विवादित स्थल पर मानवता भवन बनाया जाना चाहिए लेकिन चुपके से यह भी संदेश दे रहे हैं कि बाबरी मस्जिद के वास्तविक अहाते यानी 2.77 एकड़ भूमि पर तो राम मंदिर ही बनेगा।

लोकसभा चुनाव में अपनी नाव को गोते खाते देखकर राम मंदिर का मुद्दा बीजेपी ने बेशक छोड़ दिया हो लेकिन ग़ैर राजनीतिक शिक्षाविद् डॉ विश्वनाथ कराड जिस तरह के प्रस्ताव के साथ आए हैं वह राम मंदिर आंदोलन को लेकर आगे बढ़ी भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मंशा के अनुकूल है। आजकल पुणे की बजाय दिल्ली में ज्यादा नजर आ रहे प्रो कराड ने दिल्ली के कॉन्सटीट्यूशन क्लब में गाँधी जयंती के मौके पर एक गोलमेज कॉन्फ्रेंस बुलाई और कई प्रस्ताव पारित किए। जिसमें खास यह है कि बाबरी मस्जिद के अहाते के साथ साथ केन्द्र सरकार ने 1992 में जिस 69.77 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था, उस पर मानवता भवन के रूप में सभी धर्मों के धार्मिक स्थल बनें लेकिन बाबरी मस्जिद के 2.77 एकड़ ज़मीन पर तो सिर्फ राम मंदिर ही बने। गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षाविद् डॉ. विश्वनाथ कराड़ की अध्यक्षता में गाँधी जयंती के मौके पर धार्मिक नेताओंशिक्षाविदों औरवैज्ञानिकों के एक समागम में प्रस्ताव किया गया कि अयोध्या में सभी धर्मों के पूजा स्थल बनाए जाएँ।

दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में पुणे के विश्व शांति विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ विश्वनाथ कराड़ की अगुवाई में राम जन्मभूमि न्यास केराम विलास वेदांतिपूर्व सांसद आरिफ मोहम्मद खानशिक्षाविद् डा. विजय भटकरस्वामी अग्निवेशशिया धर्म गुरू कल्बे रुशैद रिज़वी और पत्रकार वेदप्रताप वैदिक समेत कई लोग जमा हुए और दिन भर मंथन के बाद एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसके मुताबिक़प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में 27 सदस्यी संचालन समिति बनाने की अपील की गई जो इस जटिल मुद्दे पर जल्द से जल्द कोई रास्ता निकालेगी।

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हिन्दूइस्लामबौद्धइसाईसिखजैनयहूदी की आराधना एवं पूजा स्थल के रूप में विश्वधर्मी श्रीराम मानवता भवन के निर्माण के लिए अयोध्या की 2.77 एकड़ की विवादित भूमि के पास सरकार द्वारा अधिग्रहित 67 एकड़ भूमि को भी भारत सरकार द्वारा मानवता भवन के लिए रिलीज़ करने की अपील की गई। इस सम्मेलन में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि एक राष्ट्रीय न्यास के जरिए मानवता भवनबनाया जाए। इस न्यास में सरकार के सदस्यविज्ञानधर्म और दर्शन के प्रतिनिधि तथा भारत के विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि तथा न्याय एवं कानूनमानव विज्ञान एवं समाज विज्ञान के क्षेत्र की प्रमुख हस्तियां शामिल हों। यहाँ प्रस्ताव में यह भी अपील की गई कि न्यास का नेतृत्व भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश राज्य सरकार की ओर से नामजद मुख्य न्यासी करें।

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दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में एमआईटी विश्व शांति विश्वविद्यालय की ओर से पेश किया गया अयोध्या की विवादित भूमि के विकास का संभावित मॉडल

दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में पुणे की एमआईटी यूनिवर्सिटी की तरफ से ‘‘सर्वधम संवाद के जरिए अयोध्या स्थित रामजन्म भूमिमंदिर-बाबरी मजिस्द विवाद का सर्वसम्मत समाधान निकालने की आवश्यकता’’ विषय पर आयोजित गोलमेज़ कॉन्फ्रेन्स में यह प्रस्ताव रखा गया कि 27 सदस्यीय समिति में सरकारविज्ञानधर्म और दर्शन से जुड़े लोगभारत के विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधिन्याय एवं कानून,कला और संस्कृतिमानवता एवं सामाजिक विज्ञान से जुड़े लोग शामिल हों।

बाबरी मस्जिद के विवादित अहाते समेत भारत सरकार द्वारा अधिग्रहीत की गई कुल 69.77 एकड़ भूमि पर सभी धर्मों के स्थल भी विकसित किए जाएँ। इसका एक मॉडल कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में प्रदर्शित किया गया। प्रस्ताव में कहा गया है कि मौजूदा समय में माननीयइलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा तीन भागों में बांटी गई 2.77 एकड़ की जमीन पर सिर्फ मंदिर बने और बाकी अहाते की 67 एकड़ भूमि को सुन्दर धार्मिक पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जाए जिसमें मस्जिद, गुरूद्वारा, चर्च, सिनेगॉग, जैन मंदिर, बौद्ध स्तूप और अन्य धर्मों के स्थल हों।

एमआईटी विश्व शांति विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष और यूनेस्को की एक पीठ के अध्यक्ष डा. विश्वनाथ डी कराड ने कहा, ‘‘से संबद्ध हम पूरी गंभीरता से महसूस करते हैं कि मातृभूमि भारत के व्यापक हितों की रक्षा के लिए तथा देश के दो प्रमुख समुदायों – हिन्दुओं तथा मुसलमानों के बीच संभावित नफरतबैर भावहिंसा तथा संदेह के वातावरण को कम करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक और अनिवार्य है कि हम अयोध्या में राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद के जटिललंबे समय से लंबित टकराव के समाधान के लिए गंभीर तथा लगातार प्रयास करें।’’ उन्होंने कहा ‘‘विश्वधर्मी श्री राम मानवता मंदिर ज्ञानविवकेसमर्पणआस्थाबलिदान तथा मानव सेवा की हमारीगौरवपूर्ण परम्पराओं को परिलक्षित करने की दिषा में एक सही कदम होगा जिन्हें हमारे धर्मों ने हमेशा आगे बढ़ाया है।’’

दिल्ली घोषणा पत्र में कहा गया है कि रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद केवल 2.77 एकड़ विवादित जमीन को लेकर है जिसे राम लला का जन्म स्थान बताया जाता है और जिसे माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय की ओर से इस समय तीन कानूनी पक्षकारों – राम लला का प्रतिनिधित्व करने वाले अखिल भारतीय हिन्दू महासभानिर्मोही अखाड़ा और अखिल भारतीय सुन्नी वक्फ बोर्ड को आवंटित किया गया है। हर पक्ष को विवादित भूमि का केवल 0.9 एकड़ हिस्सा मिलेगा। सभा ने कहाकि वह यह गंभीरता से महसूस करते हैं कि 0.9 एकड़ क्षेत्र वाला भूमि का टुकड़ा न तो राम लला का मंदिर बनाने के लिए और न ही मस्जिद बनाने के लिए पर्याप्त है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार किसी विवादित जमीन या स्थान पर कोई मस्जिद या पूजा स्थल का निर्माण नहीं हो सकता है। हिन्दू मान्यता के अनुसार भगवान श्री राम का मंदिर राम लला के जन्म स्थल या रामजन्म भूमि की उसी जगह पर निर्मित होना चाहिए।

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