मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के आरोपों के बाद भारत से फरार हुए शराब कारोबारी विजय माल्या ने प्रत्यर्पण मामले में लंदन में चल रही सुनवाई में भारत की न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर उंगली उठाई. साथ ही उन्होंने भारत की तुलना में पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था को बेहतर बताया.

लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में माल्या की और से पेश डॉ. मार्टिन लाउ ने कहा कि भारत के जजों से ज्यादा तटस्थ पाकिस्तान के जज होते हैं. डॉ. लाउ ने सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग के तीन अकादमिकों की एक स्टडी का हवाला देते हुए रिटायरटमेंट के करीब पहुंचे सुप्रीम कोर्ट जजों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए.

लाउ ने कहा कि, ‘मैं भारत के उच्चतम न्यायालय का काफी सम्मान करता हूं, लेकिन कभी कभार खास पैटर्न्स को लेकर कुछ दुविधाएं भी हैं. इसका यह कतई मतलब नहीं है कि यह (सुप्रीम कोर्ट) एक भ्रष्ट संस्था है. कभी-कभी यह सरकार के पक्ष में फैसला देती है, खासकर जब जज रिटायर होने की कगार पर होते हैं और (रिटायरमेंट के बाद) किसी सरकारी पद की चाहत रखते हैं. यह न्यायिक फैसलों पर सरकार को प्रभाव की ओर इशारा करता है जो न्यायिक स्वतंत्रता का स्पष्ट उल्लंघन है.

लाउ ने यह भी कहा कि भारत में मीडिया ट्रायल की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है. उन्होंने कहा कि भारत में किसी खास मुद्दे पर कुछ लोगों के साथ टीवी एंकर दमदार बहस करते हैं, मगर इससे न्यायिक पहलू प्रभावित होता है.

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