नई दिल्ली। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में शुक्रवार को मारे गए अजहर के पिता सैयद अहमद निसार को आरोपी कर्नल प्रसाद पुरोहित की याचिका में हस्तक्षेप करने की मंजूरी दे दी है।

जस्टिस एसएस शिंदे और एमएस कार्णिक की पीठ ने कहा कि यदि अनुमति दी जाती है तो पुरोहित की वजह से कोई पक्षपात नहीं होगा। यूएपीए के तहत आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित ने अपने खिलाफ आरोपों को रद्द करने का आग्रह अदालत से किया है।

बिलाल की ओर से पैरवी करनेवाले वरिष्ठ अधिवक्ता बीए देसाई ने दावा किया था कि उनके मुवक्किल को इस मामले में अपनी बात रखने का हक है। मेरे मुवक्किल ने इस धमाके में अपने बेटे को खोया है। वे पीड़ित पक्षकार हैं इसलिए उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार है।

वहीं पुरोहित की वकील नीला गोखले ने इस आवेदन का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि मेरे मुवक्किल ने याचिका में मुकदमा चलाने से जुड़ी मंजूरी को चुनौती दी है। यह मंजूरी नियमों के तहत नहीं ली गई है। इसलिए उनके मुवक्किल के खिलाफ मुकदमा न चलाया जाए। ऐसे में किसी को भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की इजाजत न दी जाए।

अब इस मामले की सुनवाई 3 दिसंबर को होगी। 29 सितंबर, 2008 को उत्तर महाराष्ट्र के मालेगांव में एक मस्जिद के पास मोटरसाइकिल पर आए एक विस्फोटक उपकरण की चपेट में आने से छह लोगों की मौत हो गई और 100 लोग घायल हो गए।

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