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मालेगांव विस्फोट के आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित ने आज बंबई हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है.

बंबई हाईकोर्ट ने पुरोहित पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत अभियोजन के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा मंजूरी दिये जाने के खिलाफ उनकी अर्जी को 18 दिसंबर को खारिज कर दिया था. अदालत ने एक अन्य आरोपी समीर कुलकर्णी की याचिका को भी खारिज कर दिया.

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कर्नल पुरोहित के वकील ने पिटीशन में हाईकोर्ट से कहा था कि यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की परमिशन देने वाले राज्य के ज्यूडिशियल डिपार्टमेंट को ट्रिब्यूनल से रिपोर्ट लेनी होती है. उन्होंने कहा था कि इस मामले में जनवरी 2009 में अनुमति दी गई थी, लेकिन ट्रिब्यूनल का गठन अक्टूबर 2010 में किया गया, लिहाजा मंजूरी का आदेश गलत है.

हालांकि इसका विरोध करते हुए एनआईए के वकील संदेश पाटील ने कहा कि पुरोहित ने मंजूरी दिए जाने का मामला तब उठाया था, जब उनकी बेल पिटीशन पर हाईकोर्ट में दलील दी जा रही थी. वहीं हाईकोर्ट ने कहा था कि मंजूरी दिए जाने के मुद्दे पर इस समय विचार नहीं किया जा सकता और इस पर निचली अदालत विचार कर सकती है.

बता दें, मालेगांव ब्लास्ट केस में स्पेशल एनआईए कोर्ट ने लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित के ऊपर से मकोका (MCOCA) हटा दिया. अब IPC की धाराओं के तहत उस पर केस चल रहा है.