2008 के मालेगांव ब्लास्ट मामले में विशेष अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की उस दलील को स्वीकार किया. जिसमे कहा गया था कि मालेगांव बम धमाका ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने के लिए किया गया था.

कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित और अन्य आरोपियों पर मुकदमा चलाने का आदेश देते हुए कहा है कि वो एजेंसी की इस दलील को स्वीकार कर रही है कि वे एक ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाना चाहते थे. धमाका दरअसल इसी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में उठाया गया कदम था.

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अदालत ने कहा, ‘इस शुरुआती चरण में गवाह संख्या 184 के बयान से ये सुरक्षित निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि भोपाल वाली बैठक (जिसमें कथित साजिश रची गई) में प्रसाद पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, रमेश उपाध्याय, समीर कुलकर्णी एवं सुधाकर चतुर्वेदी मौजूद थे.’

अदालत ने कहा, ‘उसमें औरंगाबाद एवं मालेगांव में बढ़ती जिहादी गतिविधियों के बारे में चर्चा हुई और पुरोहित ने उक्त इलाके में अभिनव भारत संगठन का विस्तार कर इस पर रोक लगाने के लिए कुछ करने की राय जाहिर की थी.’

ध्यान रहे इस मामले में सबूतों के अभाव में कर्नल श्रीकांत पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर से मकोका और यूएपीए हटा लिया गया है. दोनों के खिलाफ IPC की धारा 120B, 302, 307, 304, 326, 427, 153 A के तहत मुकदमा चलेगा.