2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में कर्नल पुरोहित समेत अन्य आरोपियों को मुंबई की एक विशेष स्थानीय अदालत से बड़ी राहत मिली है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने फिलहाल कर्नल पुरोहित समेत सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया को फिलहाल टाल दिया है। इससे पहले यूपीपीए की वैधता पर सुनवाई होगी।

कर्नल पुरोहित के वकील प्रशांत मग्गू ने बताया कि कोर्ट पहले यूपीपीए की वैधता पर सुनवाई करेगा और उसके बाद आरोप तय किए जाएंगे। सोमवार से हर रोज इसपर सुनवाई होगी। बुधवार को मामले के दूसरे आरोपी रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय ने कोर्ट के बाहर आकर तत्कालीन सरकार पर षड्यंत्र का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें फंसाने के लिए उनके ऊपर यूपीपीए जैसा सख्त कानून राजनीतिक षडयंत्र के तहत लगाया गया है।

इस मामले उपाध्याय ने दलील दी कि मुकदमे की सुनवाई शुरू करने से पहले इस पर फैसला होना चाहिए कि क्या उन पर यूएपीए लागू हो सकता है? न्यायाधीश विनोद पाडलकर ने मामले को स्थगित कर दिया और कहा कि अदालत अगले सोमवार से सभी आरोपियों की दलीलें सुनेगी। उन्होंने कहा कि दलीलों की सुनवाई हर रोज होगी और इसकी शुरुआत पुरोहित से होगी।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने पुरोहित की वह अर्जी खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि निचली अदालत को इस मामले में उनके और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने से रोका जाए। कोर्ट ने कहा था कि गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत आरोपों पर ट्रायल कोर्ट की ओर से ही फैसला लिया जाएगा।

मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईडी) धमाके हुए थे। घटना के दौरान छह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 101 लोग जख्मी हुए थे। पुरोहित का नाम इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया था, जो कि इस वक्त जमानत पर बाहर हैं।

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