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दिवाली पर 25 रु की इलेक्ट्रिक झालरों का विरोध कर स्वदेशी का नारा देने वाले को अब चीन से आयात स्वैपिंग मशीन नजर नहीं आ रही हैं. नोटबंदी के बाद से ही अमेरिका, चीन समेत जापान, डेनमार्क सहित कई देशों की चांदी हो गई हैं.

पहले 2000 के नोट के आने की वजह से  भारतीय एटीएम में सॉफ्टवेयर और ट्रे बदलने पड़े जो चीन से ही खरीदे गये थे. उसके बाद कैशलेस ट्रांजेक्शन के जरिये चीन से वित्तपोषित कंपनी पेटीएम को खूब फायदा हुआ. उसके बाद अब स्वैपिंग मशीन के लिए चीन को हजारों करोड़ का फायदा पहुंचाया जा रहा है.

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इन मशीनों का निर्माण चीन में होता हैं और ये अब भारत में आयात की जा रही है. देश भर के बैंकों जैसे  एसबीआई, यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा समेत निजी क्षेत्र के एचडीएफसी, आईसीआईसीआई आदि बैंकों में स्वैपिंग मशीन के लिए लगभग पांच करोड़ आवेदन पेंडिंग हैं.

इसी बीच अमेरि‍का की कंपनी Epson की POS प्रिंटर मशीनों का भारत में इंपोर्ट 32 फीसदी बढ़ा है. इसके अलावा दस जनवरी तक चाइना से आठ लाख स्वैपिंग मशीनों का आयात भारत में होने जा रहा है. ऐसे में अब कहना गलत नहीं होगा कि भारत में नोटबंदी से विदेशों का फायदा हो रहा है.

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