Sunday, October 17, 2021

 

 

 

अयोध्या विवाद पर बोले महमूद मदनी – रामचंद्र हिंदूओं के आस्था के प्रतीक, विवादित ढांचा मस्जिद नहीं

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लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव महमूद मदनी का अयोध्या विवाद पर बड़ा बयान सामने आया है।

उन्होने बाबरी मस्जिद को मस्जिद ही मानने से इंकार कर दिया। मदनी ने कहा है कि भगवान श्री रामचंद्र देश के बहुसंख्यक हिंदू धर्म के लोगों की आस्था के प्रतीक हैं। मुस्लिमों को भगवान श्रीराम के अनादर की इजाजत नहीं है। बीबीसी गुजराती के एक कार्यक्रम में मदनी ने कहा कि अगर किसी धार्मिक स्थल को तोड़कर अल्लाह की इबादतगाह बनाई गई तो उसे मस्जिद नहीं माना जा सकता।

मदनी ने कहा जबरदस्ती किसी का घर या मंदिर छीनकर अल्लाह का घर नहीं बनाया जा सकता। अयोध्या श्रीरामचंद्र जी की जन्मभूमि है, हिंदू आस्था का बड़ा प्रतीक है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी को सेकुलर किसी को कम्यूनल बता देना ठीक नहीं। हर पक्ष का अपना एक नजरिया होता है। हिंदुत्व के नाम पर किसी की गुंडागर्दी सहन नहीं की जा सकती। असली हिंदुओं को ही ऐसे लोगों को जवाब देना होगा।

उन्होंने कहा कि राममंदिर विवाद आपसी बातचीत से हल हो तो बेहतर होगा चूंकि इससे किसी पक्ष की हार नहीं होगी अन्यथा कोर्ट का फैसला तो स्वीकार्य होगा ही। मदनी ने कहा कि देश के बहुसंख्यक हिंदुओं के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम आस्था के प्रतीक हैं इसलिए मुसलमान को भगवान श्री राम के अनादर की इजाजत नहीं है। मदनी ने कहा इंडोनेशिया के बाद दुनिया में सबसे अधिक मुसलमान भारत में रहते हैं, धर्म का राजनीतिक उपयोग नहीं होना चाहिए लेकिन जिंदगी के लिए जरुरी है, दैनिक जीवन में धर्म अध्यात्म सिखाता है।

मदनी ने यह भी कि किसी ऑपरेशन के तहत किसी वर्ग को टारगेट करके किसी मसले का हल नहीं निकाला जा सकता है। मंदिर मस्जिद विवाद को मिल बैठकर आपसी बातचीत से हल किया जाए आखिर हम एक सभ्य समाज के लोग हैं। मदनी को इस बात का भी मलाल है कि अदालती फैसले में एक पक्ष की हार होगी व दूसरे की जीत इसलिए आपसी बातचीत से मसले का हल हो तो अधिक बेहतर होगा।

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