नई दिल्ली आधार मामले की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के दौरान मंगलवार को याचिकाकर्ता के वकील श्याम दीवान ने दावा किया कि देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अंगूठे के निशान लेने के विरोधी थे. लेकिन आज उन्ही के देश में आधार के नाम पर अंगूठे के निशान लिए जा रहे है.
सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच के समक्ष सुनवाई में दीवान ने कहा कि साउथ अफ्रीका में 1906 में जब भारतियों के अंगूठे के निशान लेने का अध्यादेश आया था तो महात्मा गांधी ने इसका विरोध किया था और लोगों को भी विरोध करने को कहा था.
उन्होंने उस वक्त के साऊथ अफ्रीका के हालात की भारत के मौजूदा हलात से तुलना करते हुए कहा कि आज  गांधी के देश में ही लोगों से अंगूठा लिया जा रहा है. इस दौरान उन्होंने, केरल डेयरी फार्मर वेलफेयर बोर्ड के लोगों के पेंशन आधार के कारण न दिए जाने का भी मुद्दा भी उठाया.
दीवान के दावे को लेकर मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ ने कहा कि सरकार अगर आधार के लिए जानकारी ले रही है तो आप (याची) उसे सर्विलांस कह रहे हैं. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, सरकार सही लोगों तक सब्सिडी, पेंशन आदि का लाभ पहुंचाना चाहती है.
इस दौरान जस्टिस अशोक भूषण ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर कोई एटीएम से पैसे निकालता है तो बैंक को पता होता है कि किसने कितना पैसा निकाला है. क्या इसको भी आप (याची) सर्विलांस कहेंगे. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की टिप्पणी थी कि आप क्या कहना चाहते हैं कि मानव से बड़ी परछाई है.
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