Saturday, June 12, 2021

 

 

 

किसान आंदोलन: सचिन, विराट और लता मंगेशकर ने बीजेपी के दबाव में किए थे ट्वीट? होगी जांच

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किसान आंदोलन के समर्थन में अमेरिकी सिंगर रिहाना और पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग द्वारा किए गए ट्वीट के बाद विरोध में आए सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar), लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar), विराट कोहली (Virat Kohli) के ट्वीट को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने जांच के आदेश दिये है। महाराष्ट्र का खुफिया विभाग इन लोगों के ट्वीट्स की जांच करेगा।

दरअसल कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने गृहमंत्री अनिल देशमुख से इस सबंध में ऑनलाइन शिकायत की थी। शिकायत में कहा गया कि रिहाना के ट्वीट के बाद सचिन तेंदुलकर, लता मंगेशकर, विराट कोहली समेत बड़े सितारों ने जो ट्वीट किए हैं। उनमें कई शब्द कॉमन है जैसे अमिकेबल ( amicable)।

सुनील शेट्टी ने तो अपने ट्वीट में मुंबई बीजेपी नेता हितेश जैन को टैग किया था। वहीं सायना नेहवाल और अक्षय कुमार का ट्वीट एकदम सेम है। इन सभी ट्वीट की टाइमिंग और पैटर्न को देख कर लग रहा है कि बीजेपी सरकार के दबाव में इन सितारों ने ट्वीट किए होंगे।

कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा है कि सचिन तेंदुलकर, लता मंगेशकर सहित इन सभी सितारों ने किसानों की मौत पर कुछ भी नहीं कहा। इतने दिनों तक यह सभी खामोश रहे लेकिन अचानक सब ट्वीट करने लगे हैं। इस ट्वीट को देख कर लग रहा है कि बीजेपी सरकार के दबाव में यह ट्वीट करवाए गए होंगे।

उन्होने कहा, इस बाबत हमने गृहमंत्री से शिकायत की है। उन्होंने जांच के आदेश भी दिए हैं। अगर बीजेपी अन्य राज्यों की सरकार गिरा सकती हैं तो इनके लिए भारत रत्न पर दबाव डालना कोई बड़ी बात नहीं है। हम सचिन या किसी के विवेक पर सवाल नहीं खड़े कर रहे हैं।

दूसरी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उसके शासन का अंदाज बहुत निराला है जो विदेशों की ‘‘अराजक आवाजों’’ की सराहना करती है लेकिन देश के हित में आवाज उठाने वाले राष्ट्रभक्त भारतीयों को ‘‘प्रताड़ित’’ कर रही है।

उन्होने ट्वीट किया,  ‘‘महाराष्ट्र में एमवीए (महाराष्ट्र विकास अघाड़ी) सरकार का शासन का अनोखा मॉडल है। विदेशों से आ रही अराजक आवाजों की सराहना कर रही है जो भारत की खराब छवि प्रस्तुत करती हैं लेकिन राष्ट्रभक्त भारतीयों को प्रताड़ित कर रही है जो देश हित में खड़े हुए हैं। यह निर्णय कर पाना मुश्किल है कि कौन ज्यादा दोषपूर्ण है-उनकी प्राथमिकताएं या उनकी मानसिकता।’’

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