dushyant dave

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सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस से जुड़े एक के बाद एक विवाद सामने आ रहे है. चार सीनियर जजों की प्रेस कांफ्रेस के एक दिन बाद अब वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने दावा किया कि सीबीआई कोर्ट के विशेष जज बीएच लोया की संदिग्ध मौत का केस बीजेपी समर्थक जज को दिया गया है.

ध्यान रहे इस केस की सुनवाई जज अरुण मिश्रा कर रहे है. दवे का कहना है कि हर किसी को पता है कि जस्टिस अरुण मिश्रा के भाजपा और बड़े नेताओं के साथ संबंध हैं. उन्होंने कहा कि जस्टिस अरुण मिश्रा को लोया केस की सुनवाई नहीं करनी चाहिए.

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इसी बीच लोया केस के याचिकाकर्ता और कांग्रेस नेता तहसीम पूनावाला ने बताया कि पहले दवे उनके केस के वकील बनने के लिए तैयार थे. लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि मिश्रा इस केस के जज है तो उन्होंने केस को सुप्रीम कोर्ट से वापस लेने की सलाह दी.

आप को बता दे कि जस्टिस लोया अपनी मौत से पहले 26 नवंबर 2005 से फर्जी मुठभेड़ में मारे गए सोहराबुद्दी सेख मामले की सुनवाई कर रहे थे. इस मामले में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह समेत कई हाई प्रोफाइल लोग आरोपी थे. हालाँकि अमित शाह को इस केस में बरी किया जा चूका है.

1 जनवरी 2014 को हार्ट अटैक से जस्टिस लोया की नागपुर में मौत हो गई थी. वे अपने सहकर्मी जज के बेटी की शादी में शामिल होने के लिए नागपुर गए थे. लेकिन बीते दिनों उनकी बहन ने उनकी मौत पर सवाल उठाते हुए भाई की मौत को मर्डर बताया.

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