डेढ़ साल में सबसे कम बढ़ी जीडीपी, कोर सेक्टर ग्रोथ भी रही सबसे कम

7:30 pm Published by:-Hindi News

नई दिल्ली. आम चुनाव से पहले मोदी सरकार के लिए बुरी खबर है। भारत की विकास दर अक्टूबर-दिसंबर 2018 के दौरान 6.6% दर्ज हुई है। यह छह तिमाही में सबसे कम है। इससे कम ग्रोथ अप्रैल-जून 2017 में 6.0% रही थी। एक साल पहले दिसंबर 2017 तिमाही में इकोनॉमी 7.7% बढ़ी थी।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के आंकड़ों के अनुसार उपभोक्ता व्यय दिसंबर तिमाही में 8.4 प्रतिशत रहा जो पिछली तिमाही में 9.9 प्रतिशत था। कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर मौजूदा तिमाही में कम होकर 2.7 प्रतिशत रही जो दूसरी और पहली तिमाही में क्रमश: 4.2 प्रतिशत तथा 4.6 प्रतिशत रही।

इसके अलावा जनवरी में कोर सेक्टर की ग्रोथ भी घटकर 1.8 पर्सेंट रह गई। यह पिछले 19 महीने में कोर सेक्टर का सबसे कमजोर प्रदर्शन है। इससे पहले जून 2017 में कोर सेक्टर की ग्रोथ 1 पर्सेंट के साथ सबसे कम रही थी। सरकार के गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार बिजली, कोयला, क्रूड और रिफाइनरी प्रॉडक्ट्स सेक्टर का प्रदर्शन जनवरी में खराब रहा, जिससे कोर सेक्टर की ग्रोथ घटकर 1.8 पर्सेंट पर आ गई। इससे पिछले महीने यानी दिसंबर, 2018 में कोर सेक्टर की ग्रोथ 2.6 पर्सेंट थी।

विकास दर जून 2017 तिमाही के बाद सबसे कम

तिमाही विकास दर
अप्रैल-जून 2017 6.0%
जुलाई- सितंबर 2017 6.8%
अक्टूबर-दिसंबर 2017 7.7%
जनवरी-मार्च 2018 7.7%
अप्रैल-जून 2018 8.0%
जुलाई- सितंबर 2018 7.0%
अक्टूबर-दिसंबर 2018 6.6%

कोर सेक्टर की सुस्त ग्रोथ का इंडस्ट्रियल प्रॉडक्शन पर भी बुरा असर पड़ेगा क्योंकि उसमें इनका वेटेज 40 पर्सेंट है। कोर सेक्टर में कोयला, क्रूड ऑइल, नैचुरल गैस, रिफाइनरी प्रोडक्ट्स, फर्टिलाइजर्स, स्टील, सीमेंट और इलेक्ट्रिसिटी शामिल हैं। माह दर माह आधार पर दिसंबर में क्रूड ऑइल का उत्पादन -3.5 पर्सेंट के मुकाबले -4.3 पर्सेंट रहा। कोल सेक्टर की ग्रोथ 3.7 पर्सेंट के मुकाबले 0.9 पर्सेंट रही। स्टील प्रॉडक्शन 6 पर्सेंट के बजाय 13.2 पर्सेंट और सीमेंट सेक्टर की ग्रोथ 8.8 पर्सेंट के मुकाबले 11.6 पर्सेंट रही। वहीं, मंथली बेसिस पर दिसंबर में बिजली का उत्पादन 5.4 पर्सेंट था, जो जनवरी में गिरकर 4 पर्सेंट पर आ गया।

सालाना ग्रोथ 2013-14 के बाद सबसे कम होगी

साल ग्रोथ
2013-14 6.4%
2014-15 7.4%
2015-16 8.2%
2016-17 8.2%
2017-18 7.2%
2018-19 7.0%

इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेन्द्र कुमार पंत ने कहा कि अर्थव्यवस्था का आकार 2018-19 में 190.54 लाख करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान है। पूर्व में इसके 188.41 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान रखा गया था। इससे सरकार को 2018-19 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। हालांकि, चालू वित्त वर्ष में जनवरी तक राजकोषीय घाटा इसके तय लक्ष्य का 121.5 प्रतिशत तक पहुंच गया।

उन्होंने कहा, “वित्त वर्ष 2018-19 में जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान बताता है कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार कुछ हल्की हो रही है… चौथी तिमाही में 6.5 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि हासिल होने पर 2018-19 में वृद्धि दर 7 प्रतिशत हो पाएगी।” सीएसओ के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 2.7 प्रतिशत, विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 8.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि व्यापार, होटल तथा परिवहन क्षेत्र की वृद्धि दर कम होकर 6.8 प्रतिशत रहने की संभावना है।

बुनियादी उद्योग की वृद्धि दर के बारे में पंत ने कहा, “अक्टूबर महीने से बुनियादी उद्योग की वृद्धि दर में गिरावट औद्योगिक गतिविधियों में कमजोर रुख तथा दूसरी छमाही में सुस्त आर्थिक वृद्धि का संकेत देता है। जनवरी 2019 में औद्योगिक वृद्धि दर में कमी की आशंका थी।”

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