Wednesday, June 23, 2021

 

 

 

बाराबंकी में 100 साल पुरानी मस्जिद को ढहाया गया, सुन्नी वक्फ बोर्ड हाईकोर्ट में करेगा अपील

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उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की रामसनेहीघाट तहसील परिसर में 100 साल पुरानी बनी मस्जिद को पुलिस-प्रशासन ने ढहा दिया। ज़िलाधिकारी नेउक्त विवादित स्थल को अवैध परिसर बताया तो वही  उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने  कड़ी नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर करने की बात कहीं।

बीते 17 मई को बाराबंकी की रामसनेही घाट तहसील परिसर में मौजूद एक सदी पुरानी मस्जिद को प्रशासन ने ढहा दिया।  वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जुफर अहमद फारूकी ने कहा कि यह मस्जिद सुन्नी वक्फ बोर्ड में दर्ज थी। इसे ध्वस्त किया जाना कानून के खिलाफ है।

न्यूज़ 18 के अनुसार, मुस्लिम धर्मगुरु मोहम्मद साबिर अली रिजवी ने कहा कि तहसील में स्थित गरीब नवाज मस्जिद को प्रशासन ने बिना किसी कानूनी औचित्य के सोमवार रात पुलिस के कड़े पहरे के बीच शहीद कर दिया। यह मस्जिद 100 साल पुरानी है और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में इसका इंद्राज भी है। इस मस्जिद के सिलसिले में किसी किस्म का कोई विवाद भी नहीं है।

उन्होने बताया कि मार्च के महीने में रामसनेहीघाट के उपजिलाधिकारी ने मस्जिद कमेटी से मस्जिद के आराजी से संबंधित कागजात मांगे थे। इस नोटिस के खिलाफ मस्जिद प्रबंधन कमेटी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी और अदालत ने समिति को 18 मार्च से 15 दिन के अंदर जवाब दाखिल करने की मोहलत दी थी।

इसके बाद 1 अप्रैल को जवाब दाखिल कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद बगैर किसी सूचना के एकतरफा तौर पर जिला प्रशासन ने मस्जिद शहीद करने का जालिम कदम उठाया है, जो कि सरासर गलत है। हमारी मांग है कि जिन अफसरों ने यह गैरकानूनी हरकत की है, उनको निलंबित किया जाए।

साथ ही मस्जिद के मलबे को वहां से हटाने की कार्रवाई रोकी जाए और यथास्थिति बरकरार रखी जाए। मस्जिद की जमीन पर कोई दूसरी तामीर करने की कोशिश न की जाए। यह हुकूमत का फर्ज है कि वह इस जगह पर मस्जिद तामीर कराकर मुसलमानों के हवाले करे।

प्रशासन की इस कार्रवाई पर डीएम डॉ आदर्श सिंह का कहना है कि तहसील परिसर में उपजिला मजिस्ट्रेट के आवास के सामने अवैध रूप से बने आवासीय परिसर के संबंध में कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को 15 मार्च 2021 को नोटिस भेजकर स्वामित्व के संबंध में सुनवाई का मौका दिया था।

नोटिस तामील होते ही परिसर में निवास कर रहे लोग परिसर छोड़कर फरार हो गए, जिसके बाद सुरक्षा की दृष्टि से 18 मार्च 2021 को तहसील प्रशासन द्वारा अपना कब्जा प्राप्त कर लिया गया।

डीएम ने कहा कि माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ खंडपीठ) द्वारा इस मामले को निस्तारित करने पर यह सिद्ध हुआ कि आवासीय निर्माण अवैध है. इसी आधार पर उपजिला मजिस्ट्रेट रामसनेहीघाट न्यायालय में न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत पारित आदेश का अनुपालन 17 मई 2021 को कराया गया है।

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