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शनिवार को पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने 2002 के गुजरात दंगों से जुड़ी लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जमीर उद्दीन शाह की पुस्तक ‘द सरकारी मुसलमान’ का विमोचन किया। इस किताब में किए गए दावों के बाद गुजरात की और केंद्र की तत्कालीन बीजेपी सरकार सवालों के घेरे में आ गई है।

बता दें कि जमीर उद्दीन शाह ने सेना की उस डिविजन का नेतृत्व किया था जिसने गुजरात में दंगों को शांत कराया था। उन्होने किताब में दावा किया कि राज्य में दंगे शुरू होने के बाद अहमदाबाद में पहुंची सेना के लिए परिवहन और अन्य साजोसामान सहायता ‘‘एक दिन बाद पहुंची’’ थी।

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अब उन्होंने इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मीडिया ने 205 पेज की किताब में से 10 पेज पकड़ लिए हैं।रिटायर अधिकारी ने कहा कि किसी पार्टी का एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए उनके पास कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है और उन्होंने जैसा सच देखा ठीक वैसे ही उसे किताब में बयां कर दिया है।

सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी ने कहा, ‘आप जितने लोगों को मारते या तबाह करते हैं स्थिति उतनी ही खराब होती जाती है। अगर किसी को मारा जाता है या उनके घर जलाए जाते हैं तो इसे भुलाने में तीन पीढ़ियां लग जाती हैं।’

पाकिस्तान की ओर से भारतीय जवान का सिर काटे जाने पर शाह ने कहा, ‘1971 की जंग के बाद किसी भी पाकिस्तानी सैनिक के साथ बुरा व्यवहार नहीं किया गया था। किसी सैनिक का सिर कांटना दूसरे सैनिक के लिए शर्म की बात है।’

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