केंद्र की मोदी सरकार आगामी शीतकालीन सत्र में ट्रिपल तलाक को खत्म करने के लिए विधेयक लाने जा रही है. ऐसे में उलेमाओं ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाना शुरू कर दिया.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी ने कहा कि तीन तलाक पर सुनवाई के बाद मोदी सरकार ने कानून बनाने की जरूरत से इनकार किया था. लेकिन अब कानून बनाने की बात कही जा रही है. उन्होंने कहा कि अब सरकार तीन तलाक को लेकर कानून बनाए जाने की खबरें बाहर निकालकर गुजरात चुनाव को प्रभावित करना चाहती है, ताकि मुसलमानों को भ्रमित कर इसमें उलझाया जा सके.

जिलानी ने कहा कि भी तक तीन तलाक पर शीतकालीन सत्र में बिल लाए जाने के संबंध में सरकार के किसी भी जिम्मेदार का बयान सामने नहीं आया है. ऐसे में स्पष्ट है कि यह गुजरात चुनाव को प्रभावित करने वाला अमल है.

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

वहीँ ‘ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत’ के अध्यक्ष नावेद हामिद ने आरोप लगाया, ‘‘विधेयक का प्रारूप जब सामने आएगा तो उसके बारे में बात करेंगे, लेकिन आज मैं यही कहूंगा कि यह एक राजनीतिक स्टंट है. जरात में चुनाव है और उसी के लिए ध्रुवीकरण का प्रयास हो रहा है. इसके अलावा जमीयत-उलेमा-हिंद के सचिव नियाज फारूकी ने कहा, ‘‘सरकार के कदम के बारे में मुझे विस्तृत जानकारी नहीं है, लेकिन मैं इतना कहूंगा कि तीन तलाक पर कानून की कोई जरूरत नहीं है.”

आप को बता दें कि शायरा बानो मामले में सुनवाई करते हुए 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को एक साथ देने पर बैन लगा दिया था. कोर्ट ने आदेश दिया था कि तीन तलाक पर छह महीने का स्टे लगाया जाना चाहिए, इस बीच में सरकार कानून बना ले और अगर छह महीने में कानून नहीं बनता है तो स्टे जारी रहेगा.

Loading...