छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के हाथों शहीद हुए इसरार को नम आंखों से दी गई आखिरी विदाई

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित कांकेर जिले में गुरुवार को बीएसएफ के जवानों पर नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया। इस घटना में चार जवान शहीद हो गए। जिसमे धनबाद के झरिया इलाके के साउथ गोलकडीह निवासी मो. इसरार खान भी शामिल है।

बीएसएफ जवान इसरार का पार्थिव शरीर शनिवार को होरलाडीह कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस माैके पर उन्हें विदाई देने के लिए हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ पड़ी। सबने नम आंखों से शहीद को विदाई दी। इसरार की शहादत ने उनके परिवार ही नहीं, बल्कि झरिया और धनबाद के लोगों को भी झकझोर दिया है।

सुबह लगभग सवा नौ बजे बीएसएफ के डिप्टी कमांडेंट घनश्याम कुमार मिश्रा व सब इंस्पेक्टर अनिल कुमार सिंह समेत 17 जवान बीएसएफ के वाहन से शहीद मो. इसरार का शव लेकर साउथ गोलकडीह आवास पहुंचे। शव पहुंचते ही क्षेत्र देश भक्ति के नारों से गूंज उठा।

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डिप्टी कमांडेंट ने शव से लिपटे तिरंगे को शहीद की मां को सौंपा। कहा कि आपके लाल की यह अंतिम निशानी है। इसे संभाल कर रखें। इसे गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस को शान से फहराना है। जब भी किसी तरह की परेशानी परेशानी हो तो तिरंगे के साथ प्रशासनिक अधिकारियों से मिले। आपको सम्मान देकर परेशानी को दूर किया जायेगा।

इसरार के पिता आजाद खान साइकिल से दुकानों में बिस्कुट व चॉकलेट बेचने का काम करते हैं। बेटे के शहीद होने की खबर सुन यह पिता भी सन्न रह गया। उनकी आंखों से आंसू बह उठे। कहने लगे खुद तो चला गया पर अब्बा को सम्मान की नेमत दे गया।

उन्होंने बताया कि चार बेटों में इसरार तीसरे नंबर का बेटा था। वर्ष 2013 में उसकी बीएसएफ में नियुक्ति हुई थी। पहली पोङ्क्षस्टग पश्चिम बंगाल के मालदा में हुई थी। दो वर्ष पहले ही छत्तीसगढ़ गया था। दिसंबर में वह घर आया था। दो जनवरी को वापस छत्तीसगढ़ गया था। देर रात तक उनके घर सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। इसरार का पैतृक घर गिरिडीह जिले के देवरी इलाके के खुरुडीह गांव में है।

भरी आंखों से पिता आजाद ने बताया कि पुत्र के बीएसएफ में जाने से पूरा परिवार गर्वित था। आज उसके शहीद होने की जब खबर मिली तो कलेजा चाक हो गया। बावजूद हमें गर्व है कि बेटे ने देश के लिए शहादत दी। वह तो हमें शहीद का पिता होने का दुनिया का सबसे बड़ा सम्मान दे गया। अल्लाह ऐसी औलाद सबको दे।

इसरार के घर में माता-पिता के अलावा तीन भाई हैं। दोनों बड़े भाइयों की शादी हो गई है। अब इसरार की भी शादी की तैयारी हो रही थी। रिश्ते आने लगे थे। पर, खुदा को कुछ और मंजूर था।

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