नई दिल्ली | भारतीय नागरिक और पूर्व नौसैनिक अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाने का मामला तुल पकड़ता जा रहा है. आज संसद में इस मुद्दे को लेकर पक्ष और विपक्ष में खूब बहस हुई. जहाँ विपक्ष ने इसे मोदी सरकार की कमजोरी करार दिया वही सत्ता पक्ष की और से कहा गया की सरकार कुलभूषण को बचाने का हरसंभव प्रयास करेगी.

मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने कुलभूषण जाधव का मुद्दा उठाया. नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे ने कहा की अगर उनको फांसी हो गयी तो यह मोदी सरकार की कमजोरी होगी. इसलिए कुलभूषण को बचाने के लिए सरकार को हर संभव प्रयास करने चाहिए और पाकिस्तान पर दबाव बनाना चाहिए. वही असुदुद्दीन ओवैसी ने कहा की पाकिस्तान की सैन्य अदालत एक ‘बनाना’ अदालत है. जहाँ किसी नियम का पालन नही किया जाता.

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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में बयान देते हुए कहा की पाकिस्तान की अदालत ने कुलभूषण को बिना सबूत के फांसी की सजा सुनाई है, उन्होंने कुछ गलत नही किया है. अगर कुलभूषण को फांसी दी जाती है तो भारत सरकार इसे सुनियोजित हत्या मानेगा. सुषमा स्वराज से पहले गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा की कुलभूषण के पास भारत का वैध पासपोर्ट है. इसलिए उनका जासूस होने का सवाल ही पैदा नही होता.

राजनाथ सिंह ने आगे कहा की हम पाकिस्तान के इस कदम की निंदा करते है. जाधव को बचाने के लिए सरकार पूरा प्रयास करेगी और उन्हें न्याय दिलाएगी. विपक्ष के हंगामा करने पर मंत्री अनंत कुमार ने आरोप लगाया की विपक्ष इस मामले में राजनीति कर रहा है. उन्होंने कहा की हम सब जाधव के साथ खड़े हुए है और सभी को मिलकर जाधव को बचाने की कोशिश करनी चाहिए.

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