रवीश कुमार

नई दिल्ली | देश के चौथे स्तम्भ के रूप में काम कर रहे मीडिया को समाज का आइना कहा जाता है. लेकिन मीडिया अब केवल खबरे न होकर खबरों का बाजार हो चुका है जब खबरे खरीदी जाती है, बेचीं जाती है. ऐसे में समझ नही आता की असल मे हम खबर देख रहे है या किसी की लिखी हुई स्क्रिप्ट. राजनेताओ की तरह अब मीडिया से भी लोगो का विश्वास उठने लगा है. पत्रकारों की विश्वसनीयता कसौटी पर तौली जा रही है, हर कोई अपने आप को देश भक्त साबित करने में लगा हुआ है लेकिन परदे के पीछे के खेल को हम कितना समझ पा रहे है वो भी एक बड़ा सवाल है.

ऐसे में केवल कुछ ही पत्रकार बचे है जिन पर दर्शक आँख मूंदकर विश्वास कर सकते है. उनकी पत्रकारिता में जितनी सच्चाई नजर आती है उतनी ही इमानदारी भी झलकती है. ऐसे ही एक पत्रकार है रवीश कुमार. वैसे तो रवीश कुमार आज किसी परिचय के मोहताज नही है फिर भी बता देते है की ये NDTV के लिए काम करते है और रात 9 बजे इनका बेहद ही मशहूर और सटीक शो आता है ‘प्राइम टाइम’.

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देश में ऐसे बिरले ही पत्रकार होंगे जो देश में घटित हो रहे घटनाक्रम पर दुसरे मीडिया हाउस की खबरों से आहत होकर अपने ही कार्यक्रम की स्क्रीन काली कर दे. यह काम करने का साहस केवल रवीश कुमार जैसे पत्रकार ही कर सकते है. लेकिन जब खबरे बाजार बन चुकी हो तो ऐसे पत्रकारों को नापसंद करने वालो की संख्या भी कम नही होती. कुछ मीडिया हाउस और राजनेता नही चाहते की देश में ईमानदार और सच्ची पत्रकारिता हो.

इसलिए जब रवीश जैसे पत्रकार नोट बंदी की जमीनी हकीकत का पता करने उस भीड़ के पास जाते है जो इस फैसले की पीड़ित है तो उनको धमकाया जाता है, उनके पीछे गुंडे छोड़े चाहते है. वो इसलिए की कुछ लोग नही चाहते की सच बाहर आये. रवीश कुमार की इसी सच्चाई से उन लोगो को डर लगता है. यही कारण है की आजकल रवीश कुमार के खिलाफ एक लॉबी काम कर रही है जो उनकी छवि ख़राब करने के लिए अफवाहे फैला रही है की उनके कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ की टीआरपी कम होने की वजह से चैनल उनको निकालने पर विचार कर रहा है.

इसके लिए बाकायदा कुछ न्यूज़ पोर्टल और सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है जहाँ रवीश कुमार के खिलाफ इस तरह की खबरे चलाई जा रही है. हालाँकि रवीश कुमार को इनसे कोई फर्क नही पड़ता क्योकि रवीश अब केवल एक पत्रकार ही नही रहे बल्कि वो एक ब्रांड चुके है. उनके नाम से कार्यक्रम चलता है, उनके नाम से ही स्पांसर्स आते है.

वही NDTV ऐसा चैनल है जो कभी टीआरपी के फेर में नही पड़ा. किसी भी खबर को केवल खबर की तरह दिखाना इस चैनल का मकसद रहा है. इस चैनल की यही खूबी लोगो को पसंद आती है. लोगो को कहते सुना है की अगर सटीक विश्लेषण सुनना है तो रवीश कुमार वाला चैनल लगाओ, वहां सही खबर आती है. इसलिए इस तरह की अफवाहे शायद ही चैनल या रविश कुमार का कुछ बिगड़ पाए.

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