जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना सैय्यद महमूद मदनी के अचानक इस्तीफा देने की खबर ने लोगों को हैरान करके रख दिया है। उनके इस्तीफे की खबर से लोग न केवल भारत में बल्कि पाकिस्तान में भी परेशान है।

कौन है मौलाना सैय्यद महमूद मदनी ?

जमीयत उलमा-ए-हिंद का गठन वर्ष 1919 में हुआ था। गठन के बाद से ही जमीयत पर मदनी परिवार काबिज रहा है। यही वजह है कि इसमें अध्यक्ष और महासचिव पद मदनी परिवार के किसी सदस्य को हो चुना गया है।

हालांकि वर्ष 2007 में चाचा मौलाना अरशद मदनी और भतीजे मौलाना महमूद मदनी के बीच जमीयत को लेकर आपसी मनमुटाव हो गया। धीरे धीरे समय गुजरा तो विवाद की जड़ें भी गहरी होती चली गई। जिसके चलते वर्ष 2008 में जमीयत दो फाड़ हो गई।

एक जमीयत पर अरशद मदनी काबिज हुए और उसका सदर बन गए। जबकि दूसरी जमीयत पर मौलाना महमूद मदनी ने अपना कब्जा जमा लिया और मौलाना कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी को अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। यह बात भी गौर करने वाली है कि मौलाना महमूद मदनी शुरू से ही जमीयत में महासचिव पद पर रहे और आज तक वो इसी पद पर चले आ रहे थे।

मौलाना महमूद मदनी पिछले करीब 17 वर्षों से जमीयत उलमा-ए-हिंद में राष्ट्रीय महासचिव के पद पर नियुक्त चले आ रहे हैं। आखिर ऐसी कौन सी वजह बनी जो अचानक उन्हें इतने पुराने पद से त्यागपत्र देना पड़ा। इसको लेकर फिलहाल चर्चा जारी है।

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