Tuesday, August 3, 2021

 

 

 

सीएए के खिलाफ केरल विधानसभा में प्रस्ताव पारित, भाजपा छोड़ सभी दलों ने किया समर्थन

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केरल विधानसभा में मंगलवार को नागरकिता संशोधन कानून को रद्द करने की मांग संबंधी प्रस्ताव पेश किया गया। जो भारी बहुमत से पारित हो गया। सत्तारूढ़ सीपीएम के नेतृत्व वाले गठबंधन एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन यूडीएफ ने विधानसभा में सीएए के विरोध में पेश प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि भाजपा के एकमात्र सदस्य ने इसका विरोध किया।

प्रस्ताव को पेश करते हुए विजयन ने कहा कि सीएए धर्मनिरपेक्ष नजरिए और देश के ताने बाने के खिलाफ है तथा इसमें नागरिकता देने में धर्म के आधार पर भेदभाव होगा। उन्होंने कहा, ‘यह कानून संविधान के आधारभूत मूल्यों और सिद्धांतों के विरोधाभासी है।’

विधानसभा में केरल के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘केरल में धर्मनिरपेक्षता, यूनानियों, रोमन, अरबों का एक लंबा इतिहास रहा है। हर कोई हमारी भूमि पर पहुंचा है। ईसाई और मुस्लिम शुरुआत में केरल पहुंच गए थे। हमारी परंपरा समावेशिता की है। हमारी विधानसभा को इस परंपरा को जीवित रखने की आवश्यकता है।’ विजयन ने विधानसभा को यह भी आश्वासन दिया कि इस दक्षिणी राज्य में कोई हिरासत केंद्र (डिटेंशन सेंटर) नहीं खोला जाएगा।

सीपीआई (एम) के विधायक जेम्स मैथ्यू ने मुख्यमंत्री के विधानसभा में पेश किए प्रस्ताव का समर्थन किया। वहीं कांग्रेस के वीडी सतीशन ने भी सीएए के खिलाफ मुख्यमंत्री द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा, ‘एनआरसी और सीएए एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। सीएए साफतौर पर सिवंधान के अनुच्छेद 13,14 और 15 का उल्लंघन है।’

सीपीआई के सी दिवाकरन ने प्रस्ताव के समर्थन में कहा, ‘विधानसभा को यह प्रस्ताव पेश करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। भारत में कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं जैसे कि पहले कभी नहीं देखे गए। इस प्रस्ताव को पास करके विधानसभा दुनिया को एक संदोश देना चाहती है।’

प्रस्ताव के खिलाफ में बीजेपी के एकमात्र विधायक ओ राजगोपला ने वोट डाला। उन्होंने विधानसभा में कहा कि देश की संसद से बनाए गए कानून के खिलाफ प्रस्ताव लाना गैरकानूनी है और यह देश के संघीय ढांचे के खिलाफ भी है।

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