नई दिल्ली | दिल्ली की केजरीवाल सरकार लगातार यहाँ के नागरिको के हितो में एतिहासिक फैसले ले रही है. चाहे दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों में सभी महंगे टेस्ट मुफ्त कराने हो या निजी स्कूलों पर नकेल कसने का काम हो. केजरीवाल सरकार हर क्षेत्र में दिल्ली के नागरिको को फायदा पहुंचा रही है. पिछले दो दिनों के अन्दर ही केजरीवाल सरकार ने दो अहम् फैसले लिए है.

शुक्रवार को कैबिनेट के फैसलों से अवगत कराते हुए केजरीवाल ने बताया की असंगठित क्षेत्रो में काम करने वाले मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी में 37 फीसदी वृद्धि करने का फैसला किया गया है. उपराज्यपाल अनिल बीजल ने न्यूनतम मजदूरी बढाने की मंजूरी दे दी है. इस दौरान केजरीवाल यह बताना नही भूले की हमारी पुर्वती सिफ़ारिशो को नही माना गया. उसके अनुसार न्यूनतम मजदूरी में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी होती.

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दरअसल पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने केजरीवाल सरकार की उस सिफारिश को ख़ारिज करते हुए एक समिति का गठन किया था. समिति ने न्यूनतम मजदूरी में 37 फीसदी बढ़ोतरी करने का सुझाव दिया था जिसको केजरीवाल सरकार कैबिनेट ने मंजूरी देते हुए फाइल को दोबारा उपराज्यपाल अनिल बीजल के पास भेज दिया. अनिल बीजल ने कैबिनेट के इस फैसले पर अपनी मोहर लगा दी.

उपराज्यपाल की मंजूरी से उत्साहित अरविन्द केजरीवाल ने कहा की कैबिनेट के फैसले के बाद दिल्ली में काम करने वाले अकुशल, अर्ध कुशल और कुशल मजदूरों के वेतन में 37 फीसदी की बढ़ोतरी हो गयी है. अब अकुशल मजदूरों को 9,500 रुपये की जगह लगभग 13,350 रुपये, अ‌र्द्धकुशल मजदूरों को 10,600 रुपये की जगह लगभग 14,698 रुपये और कुशल मजदूरों को 11,600 रुपये की जगह लगभग 16182 रुपये प्रति माह मिलेंगे.

इस दौरान केजरीवाल ने कहा की हम चाहते है की देश में हो रही आर्थिक तरक्की का फायदा गरीब की जेब तक भी जाये. जब तक उनकी जेब में पैसा नही जाएगा, गरीबी कम नही होगी और देश का उत्थान नही होगा. केजरीवाल ने बाकी राज्यों से इस फैसले को लागु करने की भी अपील की. इससे पहले केजरीवाल सरकार ने सरकारी स्कूलों में काम करने वाले गेस्ट टीचर्स के वेतन में भी भारी वृद्धि करने का फैसला लिया था.

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