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कठुआ रेप केस गवाह और सामाजिक कार्यकर्ता तालिब हुसैन की पुलिस रिमांड के दौरान बेदर्दी से पिटाई का मामला सामने आया है। इस मामले मे अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। कोर्ट ने तालिब हुसैन के परिवार वालों की याचिका को स्वीकार कर लिया है।

वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने ट्वीट कर यह जानकारी दी कि कठुआ गैंगरेप में पीड़िता की तरफ से आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता तालिब हुसैन की सांबा पुलिस स्टेशन में पुलिस रिमांड के दौरान पिटाई की गई है, जिसमें उनका सिर फट गया है और बहुत ज्यादा चोटें आईं है। उन्हें सांबा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

परिवारवालों का आरोप है कि तालिब हुसैन को पुलिस फर्जी रेप केस में फंसा रही है। परिवारवालों ने यह भी कहा कि तालिब हुसैन के साथ जम्मू-कश्मीर के पुलिस ने मारपीट भी की है। जबकि पुलिस का कहना है कि तालिब ने पुलिस हिरासत में आत्महत्या करने की कोशिश की। पुलिस ने कहा, तालिब ने खुद को चोट पहुंचाने की कोशिश की है। वह आत्महत्या करना चाहता था। उसने अपना सिर जेल की दीवार पर मार दिया है। आत्महत्या करना अपराध है इस मामले में धारा 309 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

बता दें कि तालिब हुसैन ने कठुआ बलात्कार और हत्या मामले मे बलात्कारियों के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया था। तालिब ने इस आंदोलन की कमान संभाल कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्राप्त की थी। उनकी वकील दीपिका राजवत ने दावा किया है कि तालिब को जेल में प्रताड़ित किया गया है। इसी में उन्हें चोट आई है। जेल में दुष्कर्म के आरोपियों को पीटा जाता है। हम इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं करेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले तालिब हुसैन की परित्यक्त पत्नी ने उनके खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराया था, लेकिन 30 जुलाई को जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने हुसैन की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। लेकिन उसके अगले ही दिन तालिब की परित्यक्त पत्नी की भाभी ने उनके खिलाफ डेढ़ महीने पहले उनके साथ रेप करने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। जिसपर कार्रवाई करते हुए इसके अगले ही दिन पुलिस ने तालिब को गिरफ्तार कर लिया।

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