kathua asifa rape protest

कठुआ में इस साल जनवरी में आठ साल की एक लड़की के साथ मंदिर मे सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले मे बड़ा खुलासा हुआ है। फोरेंसिक मेडिकल के विशेषज्ञों ने बताया कि नशीली दवाओं के ओवरडोज की वजह से बच्ची कौमा मे चली गई थी।

क्राइम ब्रांच ने पीड़िता के विसरा को इस महीने ‘मन्नार’ कैंडी (स्थानीय गांजे का एक किस्म) और 0.5 एमजी इस्पिट्रिल टैबलेट के प्रभाव की जांच के लिए फोरेंसिक लैब में भेजा था। क्राइम ब्रांच को भेजे गए मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार 8 वर्षीय पीड़िता को जो टैबलेट दिया गया, उसकी वजह से वो कोमा में चली गई थी।

विसरा का परीक्षण करने के बाद डॉक्टरों ने कहा कि लड़की को जो दवा दी गयी थी उसमें क्लोनाजेपाम सॉल्ट था और उसे मरीज के उम्र और वजन को ध्यान में रखकर चिकित्सकीय निगरानी में ही दिया जाता है।

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रिपोर्ट मे कहा गया है, ‘‘ उसके (पीड़िता के) 30 किलोग्राम वजन को ध्यान में रखते हुए मरीज को तीन खुराक में बांटकर प्रति दिन 0.1 से 0.2 एमजी दवा देने की सिफारिश की जाती है.’’ उसमें कहा गया है, ‘‘ उसे 11 जनवरी , 2012 को जबर्दस्ती 0.5 एमजी की क्लोनाजेपाम की पांच गोलियां दी गयीं जो सुरक्षित डोज से ज्यादा थी. बाद में भी उसे और गोलियां दी गयीं.

ज्यादा डोज के संकेत और लक्षण नींद, भ्रम, समझ में कमी, प्रतिक्रियात्मक गतिविधि में गिरावट, सांस की गति में कमी या रुकावट, कोमा और मृत्यु हो सकते हैं। डॉक्टरों ने कहा कि यदि क्लोनाजेपाम को अल्कोहल जैसी अन्य चीजों के साथ लिया जाए तो जोखिम ज्यादा हो जाता है।