जम्‍मू-कश्‍मीर के कठुआ में आठ साल की बच्‍ची के साथ मंदिर में सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में पुलिस ने सबूतों को मिटाने का पूरा प्रयास किया था। इस बात का खुलासा हेड कॉन्सटेबल सुरिंदर पाल ने सोमवार को ट्रायल कोर्ट में किया है।

सुरिंदर पाल ने बताया कि सब-इंस्पेक्टर आनंद दत्ता ने घटना से जुड़े सबूत मालखाने में जमा नहीं करने दिया। इतना ही नहीं दत्ता ने उन्हें घटना का रिकॉर्ड बैकडेट में दर्ज करने के लिए भी धमकाया था। बता दें कि सब-इंस्पेक्टर आनंद दत्ता पर मामले के आरोपी सांझी राम से पैसे लेकर सबूत मिटाने का आरोप है।

सुरिंदर पाल ने बताया कि सब-इंस्पेक्टर आनंद दत्ता बलात्कार की घटना के बाद 18 जनवरी को 3 अहम सबूतों के साथ हीरानगर पुलिस स्टेशन आए थे। इन तीन चीजों में एक हेयरबैंड, दुपट्टा और मृतका के जूते शामिल थे। नियमों के अनुसार, केस से जुड़ी हर चीज, जो जांच एजेंसियों द्वारा सील की जाती हैं, पुलिस स्टेशन के मालखाने में जमा करायी जाती है।

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उन्होने कहा, लेकिन आनंद दत्ता ने इन सबूतों को मालखाने में जमा नहीं किया और अपने पास रखा। मामले की जांच कर रही जम्मू कश्मीर क्राइम ब्रांच की टीम का आरोप है कि आनंद दत्ता ने सबूतों से छेड़छाड़ कर जांच को गुमराह करने की कोशिश की।

जांच एजेंसियों का दावा है कि आनंद दत्ता ने इस मामले के अन्य आरोपी और पुलिस हेड कॉन्सटेबल तिलक राज के साथ मिलकर पीडिता द्वारा मौत के वक्त पहने गए कपड़ों को धोने की कोशिश की थी और इन्हें मालखाने में जमा नहीं कराया था।