Tuesday, September 28, 2021

 

 

 

कश्मीर के नेता सिर्फ अपना सशक्तिकरण चाहते है: राज्यपाल मलिक

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अखनूर: जम्मू-कश्मीर में पंचायच चुनाव संपन्न होने के बाद राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने गुरुवार को पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी (पीडीपी) और नैशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं पर निशाना साधा। दोनों राजनीतिक पार्टियों द्वारा पंचायत चुनाव का बहिष्कार करने के मुद्दे पर राज्यपाल ने कहा कि मैंने प्रोटोकॉल तोड़कर महबूबा और उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की और इन नेताओं से पंचायत चुनाव का बहिष्कार ना करने का अनुरोध किया। लेकिन इसके बावजूद भी यह पार्टियां इस चुनाव में शामिल नहीं हुईं। राज्यपाल ने कहा कि यह पार्टियां लोगों का नहीं बल्कि सिर्फ अपना सशक्तिकरण चाहती हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर के राजनेता चाहते हैं कि युवाओं की मौत हो और दिल्ली को ब्लैकमेल कर दबाव बनाया जा सके। किसान मेले का शुभारंभ करने के बाद कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संविधान के दायरे में जम्मू-कश्मीर के लोगों की हर मांग को पूरा करने के लिए तैयार हैं क्योंकि उनके मन में कश्मीर के लोगों के प्रति प्यार व सम्मान है। कहा कि इस गलत धारणा को उन्होंने निकाय व पंचायत चुनाव के दौरान साफ कर दिया था और साफ संदेश दिया था कि नई दिल्ली किसी भी तरह के दबाव में आने वाला नहीं है। वह ब्लैकमेल के किसी भी दबाव में आने वाला नहीं है। यदि गोलियां चलेंगी तो इधर से उन्हें बुके नहीं दिया जाएगा। कश्मीर में आतंकियों को मारने से कोई समाधान नहीं निकलेगा। उन्हें हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होना चाहिए। वह यहां इन बच्चों का जान लेने के लिए नहीं हैं। यदि वह लौट आए तो हम उनके लिए कुछ करने को तैयार हैं। इस संबंध में रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है।

मलिक ने अलगाववादियों तथा कश्मीर की मुख्यधारा की पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब आधी रात को भारी बर्फबारी के बीच सेना आतंकियों से मुकाबला कर रही होती है तो मस्जिदों से लोगों को जुटकर पत्थरबाजी करने के लिए उकसाया जाता है। आतंकियों के शव छीनने तथा सेना के वाहन को घेरकर हथियार छीनने के लिए भड़काया जाता है। इस दौरान यदि कोई मारा जाता है तो घाटी में बंद का आह्वान किया जाता है। लोगों को भड़काने पर सवाल करते हुए कहा कि पूरे विश्व में यह कहां होता है कि आप सेना को निशाना बनाओ और वह छोड़ देंगे। इसे सख्ती के साथ कुचला जाएगा। उन्होंने लोगों से सेना के प्रति विचार बदलने तथा विचारधारा बदलने को कहा। यदि कुछ हो सकता है तो वह बातचीत से ही संभव है। आगे आकर देश के संविधान के दायरे में बात करें। आपका अलग झंडा और अलग विधान है। इसके बाद भी मामले को तूल दिया जा रहा है।

राज्यपाल मलिक के इस बयान के बाद उमर अब्दुल्ला ने भी इसपर पलटवार किया। सत्यपाल मलिक के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर ने ट्विटर पर लिखा,’राज्यपाल महोदय, ऐसे अपमानजनक बयान देना बंद करें। ऐसे बयान राज्यपाल के पद पर आसीन किसी व्यक्ति को शोभा नहीं देते। सिर्फ राज्यपाल पद का सम्मान ही है, जिसने मुझे बार-बार उन बातों का जिक्र करने से रोक रखा है जो कि मेरी आपसे मुलाकात के दौरान हमारे बीच हुई थी। राज्यपाल महोदय, कृपया राजनीति करना बंद करें और अपने काम पर ध्यान दें।’

पीडीपी के ओर से ट्विटर हैंडल पर लिखा गया है कि लोकतांत्रिक सरकार को कार्य करने नहीं देना और लोगों और राजनीतिक दलों की भागीदारी के बिना लोकतंत्र के सशक्तीकरण की बात करना। पंचायत की बात करते हैं। अनैतिक रूप से विधानसभा भंग करना व्यक्तिगत सशक्तीकरण है, बहिष्कार नहीं।

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