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उत्तर प्रदेश के कासगंज में हुई सांप्रदायिक हिंसा का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग तक पहुँच गया है. दोनों ने ही यूपी सरकार को नोटिस जारी कर पुरे मामले की रिपोर्ट तलब की है.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में मानवाधिकार जन निगरानी समिति (पीवीसीएचआर), वाराणसी के प्रमुख डॉ. लेनिन रघुवंशी ने 29/01/2018 को आयेाग में शिकायत दर्ज कराई थी. जिसके तहत कासगंज हिंसा और पीवीसीएचआर के दफ्तर से जुड़े चार व्‍यक्तियों राहुल यादव, अतुल यादव, निशांत यादव और उनके पिता राजू यादव को पुलिस द्वारा ने गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेने की शिकायत की गई थी.

शिकायत में कहा गया कि ये सभी उन दंगाइयों का विरोध कर रहे थे जो सांपदायिक दंगे के दौरान दुकानें जला रहे थे. बावजूद इन चारो को गिरफ्तार किया गया. जिसमे दो के बारें में कोई खबर नहीं है.

वहीँ दूसरी और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने भी मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए बुधवार को राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और इस घटना के बाद हुई गिरफ्तारियों, दर्ज प्राथमिकियों और हालात सामान्य बनाने के लिए उठाए गए कदमों का ब्यौरा देने को कहा है.

आयोग के अध्यक्ष सैयद गैयूरुल हसन रिजवी ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया. इसमें राज्य प्रशासन से पांच दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है. रिजवी ने कहा, हमने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा. कई लोगों ने इस तरह की बातें की हैं कि गिरफ्तारियों में भेदभाव हुआ है. वैसे, रिपोर्ट मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा.

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