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कासगंज । उत्तर प्रदेश के कासगंज में गणतंत्र दिवस के दिन हिंसा भड़क उठी। दो समुदाय के बीच हुई इस हिंसा में जहाँ एक व्यक्ति की मौत हो गयी वही दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। फ़िलहाल कासगंज की स्थिति नियंत्रण में लेकिन तनावपूर्ण बनी हुई है। कर्फ़्यू के बावजूद कुछ जगहों पर हिंसा की ख़बरें है। उधर नफ़रत की भेंट चढ़े अभिषेक गुप्ता के परिजन उसे शहीद का दर्जा देने की माँग कर रहे है।

22 वर्षीय अभिषेक गुप्ता बीकाम फ़ाइनल ईयर का छात्र था। अपने बेटे की मौत पर आंशु बहा रहे उनके पिता सुशील गुप्ता का कहना है की वह पढ़ाई के लिए यूपी से बाहर जाने वाला था। लेकिन इस दंगे ने उनके घर के चिराग़ को छिन लिया। सुशील गुप्ता ने अभिषेक के हिंसा भड़काने वाली भीड़ से ताल्लुक़ रखने से इंकार किया। उनका कहना है की वह किसी दक्षिण पंथी संगठन से नही जुड़ा था बल्कि एक एनजीओ के ज़रिए समाज सेवा कर रहा था।

उधर इस हिंसा में कुछ ऐसे लोग भी घायल हुए जो उस दिन कासगंज अपने रिश्तेदारों के यहाँ आए हुए थे। इनमे से ही एक शख़्स है अकरम हबीब। 35 वर्षीय अकरम ने इस हिंसा में अपनी एक आँख खो दी। फ़िलहाल अकरम का अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज व अस्‍पताल में इलाज चल रहा है। हिंसा के दिन अकरम अपनी पत्नी के साथ कासगंज आया हुआ था। यहाँ उसकी ससुराल है। उसकी पत्नी गर्भवती थी और दो दिन बाद उसकी डिलीवरी होने वाली थी इसलिए अकरम अपनी पत्नी को लेकर कासगंज आया हुआ था।

हिंसा का पता चलने पर अकरम ने दूसरे रास्ते से जाने की सोची। इसलिए जब उसने कुछ लोगों से रास्ता पूछा तो अकरम की दाढ़ी देखकर लोगों ने अकरम पर ही हमला बोल दिया। अकरम ने बताया की उन लोगों ने मुझे पत्थर और लाठी से पिटा। इस दौरान मेरी एक आँख फूट गयी। उन्होंने मुझे केवल इसलिए ज़िंदा छोड़ किया क्योंकि मेरी पत्नी लगातार उनसे मुझे छोड़ने की विनती कर रही थी। उन्हें मुझे और मेरी पत्नी पर रहम आ गया और हमें जाने दिया। अकरम का आरोप है की पुलिस ने मेरी मदद नही की और घायल होने के बावजूद मैं गाड़ी चलकर अपनी पत्नी को अस्पताल लेकर गया।

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