रिहाई के बाद बोले कफील खान – मेरे खिलाफ हो रही साजिश, ये मेरी अब आखिरी मुलाक़ात हो

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लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर मथुरा जेल से रिहा हुए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर कफील खान ने मी़डिया से बातचीत में अपनी आप बीती सुनाई। डॉ. कफील ने कहा कि जेल में उनका न सिर्फ मानसिक बल्कि शारीरिक उत्पीड़न भी हुआ है।

अमर उजाला से से बातचीत में डॉ. कफील ने कहा कि बैरक में 40 कैदियों की क्षमता थी लेकिन 150 कैदी रखे गए। महामारी के समय जहां देश के प्रधानमंत्री सोशल डिस्टेंसिंग की बात कहते हैं, जेल के अंदर इन नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। ऐसे में जेल में बंदियों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि जेल में बंदी उनके बारे में पहले से जानते थे।

उन्होंने कहा, ‘गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में 70 बच्चों की मौत के मामले से ठीक पहले स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मेडिकल कॉलेज आए थे और उन्होंने मेरी बहुत मेहनत से बनाए गए आईसीयू वार्ड का निरीक्षण किया था। उन्होंने मेरी पीठ भी थपथपाई थी। उस घटना के बाद जो स्थितियां बनीं, मुख्यमंत्री के सामने मेरा प्रस्तुतीकरण राजनीतिक प्रत्यक्षीकरण के साथ किया गया। किसी ने कहा कि मैं सपा का आदमी हूं, किसी ने कहा कि मैं बसपा का आदमी हूं। मेरे मामले में मुख्यमंत्री को गुमराह किया गया।

उन्होंने कहा, ‘मुझ पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई इसलिए नहीं की गई कि मैंने अलीगढ़ में सीएए के विरोध में संबोधन किया। बल्कि इसलिए कि गई कि मेरी रिहाई होने वाली थी और किसी तरह मुझे जेल में रखा जाए। वहीं बीबीसी के साथ बातचीत में कफील ने यह भी कहा कि वह अभी मथुरा से घर नहीं जा रहे हैं क्योंकि सरकार उन्हें और मामलों में फंसाने की कोशिश कर रही है। हो सकता है सरकार मुझे मरवा भी दे। आप सबके साथ शायद यह आखिरी मुलाकात हो।

डॉक्टर कफील अहमद ने सरकार से मांग की है कि उन्हें उनकी नौकरी वापस दी जाए जिससे वो लोगों की इलाज से मदद कर सकें। डॉक्टर कफील का कहना है कि वो बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों की मदद करना चाहते हैं, क्योकि बाढ़ के दौरान इन इलाकों में बीमारियां ज्यादा फैलती हैं।

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