उत्तर प्रदेश के मथुरा की जेल में बंद डॉक्टर कफील खान को रिहा न करने को लेकर उनकी पत्नी शबिस्ता खान ने यूपी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। शबिस्ता खान ने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट आदेश के बाद डॉ. कफील खान को भी जेल से रिहा नहीं किया गया।

शबिस्ता खान का आरोप है कि बीती 28 मार्च को कफील की रिहाई का ऑर्डर भी आ गया था लेकिन बाद में उसे निरस्त कर दिया गया। शबिस्ता ने कहा, ’23 तारीख को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद डॉ कफील को रिहा किया जाना था। डाक्टर कफील को भी मथुरा जेल से रिहा किया जाना था। उनका नाम भी जेल की ओर से भेजी गई लिस्ट में शासन को गया था। 28 मार्च को सुबह उनकी रिहाई का ऑर्डर भी आ गया था कि शाम को उन्हें रिहा किया जाएगा लेकिन शाम को लखनऊ से किसी अधिकारी का फ़ोन आने पर उनकी रिहाई रोक दी जाती है।’

गौरतलब है कि कफील पर आरोप है कि सीएए, एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिया था। यूपी पुलिस का दावा है कि उनके भाषण से ही प्रेरित होकर एएमयू के छात्रों ने 15 दिसंबर को उग्र प्रदर्शन और तोड़फोड़ की घटना को अंजाम दिया था। इससे पहले अलीगढ़ की अदालत ने डॉ. कफील को जमानत दे दी थी। लेकिन रिहा होने से पहले जिला मजिस्ट्रेट ने एनएसए के तहत उनकी हिरासत के लिए एक निर्देश पारित किया था।

हाल ही में कफील खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिख भारतीयों को कोरोना जैसी घातक महामारी से बचाने के लिए Corona Stage-3 के खिलाफ एक रोड मैप का जिक्र किया था। उन्होंने पीएम मोदी को चिट्ठी में लिखा, ’20 वर्ष के अनुभव के आधार पर Corona Stage-3 के खिलाफ कैसे लड़ा जाए, उसका रोड मैप आपको देना चाहता हूं। जिससे इस महामारी से फैलते संक्रमण पर अंकुश लगाया जा सके।’

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को एक अहम निर्देश दिया था कि सात साल से कम की सज़ा पाए या सात साल से कम की सज़ा के आरोपों में जेल में बंद अंडर ट्रायलकैदी व 65 साल से ऊपर की उम्र के कैदियों को नियमों व शर्तों के दायरे में रहते हुए छोड़ दिया जाए।

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