Sunday, December 5, 2021

कठुआ रेप केस: पीड़ित परिवार चाहता है जम्मू से बाहर हो मामले की सुनवाई

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कठुआ रेप मामले में पीड़ित परिवार और उनकी वकील को मिल रही धमकियों के बाद अब इस केस की आगे की सुनवाई जम्मू से बाहर कराए जाने की मांग उठ रही है. दीपिका सिंह राजावत को केस छोड़ने के लिए धमकियाँ दी जा रही है.

राजावत ने न्यूज 18 को बताया कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं और वे इस केस को आउट ऑफ स्टेट ले जाना चाहते हैं, ताकि किसी तरह का दबाव न रहे और पीड़िता को इंसाफ मिले. दीपिका ने कहा कि वे आखिरी दम तक लड़ेंगी और पीड़िता को इंसाफ ज़रूर दिलाएंगी.

बता दें कि जम्मू बार एसोसिएशन की और से ये धमकियाँ दी जा रही है. राजावत ने बीबीसी से फ़ोन पर हुई बातचीत में कहा कि बार एसोशिएशन के अध्यक्ष की और से कोर्ट की सीढ़ियों पर उन्हें धमकियां दी गई. इसलिए उन्होंने अपने लिए सुरक्षा की मांग भी की है.

हालाँकि बार एसोशिएशन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह ने दीपिका के आरोपों को निराधार बताया है. बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बी.एस. सलाथिया ने पत्रकारों से कहा कि राजकीय अपराध शाखा ने न्यायालय में जिन अभियुक्तों के खिलाफ कठोर आरोपपत्र पेश किया है, वकीलों को उनका समर्थक बताने की कोशिश की जा रही है.

सलाथिया ने कहा, “जम्मू के वकीलों पर राज्य को सांप्रदायिक रूप से विभाजित करने का आरोप लगाकर बदनाम किया जा रहा है. हम सभी बस यही बोल रहे हैं कि मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए. क्या सीबीआई सांप्रदायिक है?”

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इस पर दीपिका का कहना है कि कठुआ मामले में क्राइम ब्रांच की जांच से पूरा परिवार संतुष्ट है. वो चाहती हैं कि क्राइम ब्रांच को ही मामले की जांच पूरी करने दी जाए. हालांकि दीपिका के मुताबिक परिवार सीबीआई जांच नहीं चाहता.

इसके पीछे की वजह बताते हुए दीपिका कहती है, “अब सीबीआई इस मामले में क्या करेंगे? बच्ची के कपड़े तक धुल गए हैं. सभी सबूत मिट चुके हैं.” पूरे मामले में हिन्दू-मुस्लिम किए जाने को लेकर दीपिका आहत हैं. उनका मानना है कि जब कुछ नहीं मिलता तो लोग अपने सपोर्ट में इस तरह की बातें करते हैं.

वो कहती हैं, “मैं ख़ुद कश्मीरी पंडित हूं. मैं पैदा कश्मीर में हुई, लेकिन मेरी कर्मभूमि जम्मू है. मैं भी उसी हिंदू समाज से हूं, इसलिए मुझे कभी-कभी शर्म आती है.”  दीपिका बताती हैं, “मैं बच्चों के अधिकार को लेकर काफी लंबे समय से काम कर रही हूं. इस केस को मैंने शुरुआत से फ़ॉलो किया. मेरी भी पांच साल की बेटी है. पीड़िता की कहानी इतनी दर्दनाक थी कि मैंने खुद उनसे सम्पर्क साधा.”

उन्होंने बताया कि फ़रवरी के महीने में मैं परिवार से मिली और पूरे मामले में कोर्ट की निगरानी में क्राइम ब्रांच की जांच के आदेश कराने में हमें महत्वपूर्ण सफलता मिली. इस मामले के बाद अब एक बार फिर बहस छिड़ी है कि नाबालिगों के साथ रेप के दोषी को फांसी हो?

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