सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का सामना कर रहे कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सीएस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के सात वरिष्ठ जजों से 14 करोड़ का मुआवजा मांगा है.

जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर और एवं छह अन्य वरिष्ठतम जजों के खिलाफ स्यू मोटो आर्डर हर्जाने के दौर 14 करोड़ रुपये देने का आदेश जारी कर दिया. उन्होंने आदेश में कहा कि उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया गया और उनकी बेइज्जती की गई जिससे उनके सम्मान को ठेस पहुंची है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही जस्टिस कर्णन की सभी न्यायिक शक्तियां छीन ली थीं.

सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की पीठ ने जस्टिस कर्णन के अवमानना के एक मामले में अदालत में न पेश होने पर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया था. साथ ही उन्हें 31 मार्च तक अदालत में पेश करने के लिए कहा था. हालांकि उन्होंने शनिवार को (11 मार्च) कहा था कि वह 31 मार्च को अवमानना की कार्यवाही में शरीक नहीं होंगे.

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यह पूछे जाने पर कि क्या वह 31 मार्च को सात सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष निर्धारित अवमानना कार्यवाही में शरीक होंगे, न्यायमूर्ति कर्णन ने नकारात्मक जवाब देते हुए कहा, ‘‘मुझे क्यों होना चाहिए?’’

इसके साथ ही जस्टिस कर्णन ने अपने स्यू मोटो फैसले में सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के 20 मौजूदा जजों के खिलाफ जांच करके रिपोर्ट संसद को सौंपने का आदेश भी दिया है. सभी न्यायिक शक्तियां छीन लिए जाने के बावजूद जस्टिस कर्णन ने बुधवार (15 मार्च) को ये आदेश जारी किया.

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