सुप्रीम कोर्ट में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के 71वें समारोह पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने अपने भाषण की शुरूआत देश की आजादी के लिए आवाज उठाने वाले अब्दुल्लाह और शेर अली अफरीदी के जिक्र के साथ की.

इउन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत के सवाल के साथ की जिसमे उन्होंने पुछा क्या आपने कभी अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले अब्दुल्लाह का नाम सुना है? फिर बाद में स्वयं ने ही इस सवाल का जवाब दिया और कहा, अब्दुल्लाह एक मुस्लिम जांबाज़ थे, जिन्होंने ब्रितानी साम्राज्य की भेदभावपूर्ण नीतियों का विरोध करते हुए 28 सितम्बर 1871 को कोलकता में हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जान पेकिंस्टन नारमन को चाक़ू मारकर हत्या कर दी थी. उन्होंने बताया, अब्दुल्लाह हत्या करने के बाद भागे नहीं बल्कि ख़ुद को पुलिस के हवाले कर दिया.

इस दौरान चीफ जस्टिस ने शेर अली अफरीदी भी जिक्र किया, और बताया कि अंग्रेज न्यायाधीश की हत्या के बाद भारत में ब्रिटेन के गर्वनर जनरल ने एलान कर दिया कि वह एक भी वहीदी मुसलमान को ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे. जिसके जवाब में 4 फ़रवरी 1872 को अंग्रेज़ गर्वनर जनरल की शेर अली आफ़रीदी नामक एक मुसलमान ने चाक़ू से हमला करके हत्या कर दी. लेकिन आज भारत में कितने लोग अंग्रेज़ गर्वरन जनरल की हत्या करने वाले के बारे में जानते हैं?

उन्होंने आगे कहा, पिछले सप्ताह मैं एक शादी में चंडीगढ़ गया. वहां मैंने अपने बेटे की तरफ से तोहफे में मिली टीशर्ट पहनी. उस पर लिखा था ‘प्राउड टू बी ए सिख, बाय बर्थ एंड बाय चॉइस.’ मुझे बहुत अच्छा लगा. ये देश आपको अपने धर्म पर, अपने क्षेत्र पर गर्व करने का मौका देता है. हमें इस देश पर गर्व करना चाहिए.

जस्टिस खेहर ने आखिर में कहा, ‘हर किसी को अपनी धार्मिक और जातीय पहचान पर गर्व होना चाहिए. संविधान में भी यही लिखा है. उन्होंने कहा कि उन्हें सिख होने पर गर्व है.

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