लाभ के पद के मामले में चुनाव आयोग की सिफारिश पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने सवाल उठाए है.

काटजू ने अपने ट्वीट में कहा, आजादी के बाद से करीब 9500 विधायकों को अलग अलग विधानसभाओं ने संसदीय सचिव के पद से नवाजा. इन मामलों में चुनाव आयोग ने 455 नोटिस जारी किए और हाईकोर्ट ने 100 से ज्यादा नियुक्तियां निरस्त की हैं. यह पहली बार है कि किसी विधायक को अयोग्य करार दिया गया है. यह पूरी तरह से बदले की भावना से की गई कार्रवाई है. जस्टिस काटजू के इस ट्वीट को आम आदमी पार्टी ने रीट्वीट किया है.

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ध्यान रहे दिल्ली विधानसभा चुनावों में 70 में से 67 सीटें जीतने वाली आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपने 21 विधायकों को दिल्ली सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में संसदीय सचिव बनाया था. जिसकी शिकायत इस साल चुनाव आयोग से की गई थी. नियम के मुताबिक़ दिल्ली में केवल एक संसदीय सचिव बन सकता है.

जिन 20 विधायकों को अयोग्य ठहराया गया है उसमें आदर्श शास्त्री (द्वारका), अल्का लांबा (चांदनी चौक), अनिल बाजपेयी (गांधी नगर), अवतार सिंह (कालकाजी), कैलाश गहलोत (नजफगढ़), मदन लाल (कस्तूरबा नगर), मनोज कुमार (कोंडली), नरेश यादव (मेहरौली), नितिन त्यागी (लक्ष्मी नगर), प्रवीण कुमार (जंगपुरा) शामिल हैं.

इनके अलावा राजेश गुप्ता (वजीरपुर), राजेश ऋषि (जनकपुरी), संजीव झा (बुराड़ी), सरिता सिंह (रोहतास नगर), सोमदत्त (सदर बाजार), शरद कुमार (नरेला), शिवचरण गोयल (मोती नगर), सुखबीर सिंह (मुंडका), विजेंद्र गर्ग (राजेंद्रनगर) और जरनैल सिंह (तिलक नगर) भी शामिल हैं.

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