चीफ जस्टिस जेएस खेहर के रविवार को रिटायर होने के बाद अब न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा आज देश के 45वें मुख्य न्यायाधीश बन गए. उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई.

दीपक को निर्भया केस में दोषियों को मौत की सजा देने, याकूब मेनन को फांसी और सिनेमाघरों में राष्ट्रगान की अनिवार्यता जैसे कई ऐतिहासिक फैसले देने के लिए जाना जाता है. उनका कार्यकाल तीन अक्टूबर 2018 को समाप्त होगा.

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14 फरवरी 1977 में ड़ीसा हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस शुरू करने वाले मिश्रा भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बनने वाले ओडिशा की तीसरे न्यायाधीश होंगे. उनसे पहले ओडिशा से ताल्लुक रखने वाले न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्रा और न्यायमूर्ति जीबी पटनायक भी इस पद पर रहे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दीपक मिश्रा को मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने पर ट्वीट के जरिए बधाई दी है. उन्होंने लिखा- भारत के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ लेने पर जस्टिस दीपक मिश्रा को बधाई देता हूं. मैं उनसे बेहतरीन कार्यकाल की कामना की करता हूं.

ऐतिहासिक फैसले देने के लिए प्रसिद्ध दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ही अयोध्या मामले के अलावा बीसीसीआई रिफार्म, सहारा सेबी मामले की सुनवाई कर रही है.

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