सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह मामले पत्रकार विनोद दुआ को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण की अवधि बढ़ा दी है। कोर्ट ने कहा कि 18 सितंबर को अगली सुनवाई तक कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने बुधवार को एक अंतरिम आदेश देते हुए कहा कि मामले में अगली सुनवाई तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। शिमला के कुमारसेन थाने में पुलिस ने दुआ के खिलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 124 (A) ,268, 501,505 के तहत मामला दर्ज किया है।

अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में कहा, ‘विनोद दुआ पर अपने YouTube कार्यक्रम, ‘द विनोद दुआ शो’ में कुछ बयान देने का आरोप हैं, जो कथित तौर पर सांप्रदायिक घृणा को उकसाने की प्रकृति के थे और शांति भंग करने और सांप्रदायिक विद्वेष के कारण हो सकते हैं।’

वरिष्ठ वकील और पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) विकास सिंह ने दुआ के लिए अपील करते हुए, शीर्ष अदालत से कहा था कि एक पत्रकार होने के नाते अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सभी अधिकार हैं और सरकार की आलोचना करने का वैध अधिकार भी है।

इससे पहले कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया था कि सीलबंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट जमा कराए। बीजेपी के स्थानीय नेता श्याम की शिकायत पर छह मई को दुआ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। श्याम का आरोप है कि विनोद दुआ ने अपने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री पर वोट हासिल करने के लिये मौत और आतंकी हमलों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।

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