Wednesday, July 28, 2021

 

 

 

ज्यादा सहिष्णुता से देश का बेड़ा गर्क हुआ : पूर्व सीबीआई चीफ

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दिल्ली के जेएनयू विवाद और असहिष्णुता जैसे चर्चित मुद्दों के बीच सीबीआई के पूर्व निदेशक जोगिन्दर सिंह ने कहा है कि ज्यादा सहिष्णुता ने ही देश का बेड़ा गर्क किया है। यदि देश में सहिष्णुता कम होती तो आज जेएनयू जैसे मामले नहीं होते। वे रविवार को ऐश्वर्या कॉलेज की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने जोधपुर आए थे। इस दौरान उन्होंने राजस्थान पत्रिका से विशेष बातचीत की। पेश है बातचीत के अंश —

जेएनयू में जैसे देशविरोधी नारे लगे हैं, क्या पहले भी ऐसा होता था?

मेरे कार्यकाल में इस तरह का कोई मामला सीबीआई के पास नहीं आया। यह सब वोट बैंक के लिए हो रहा है। देश की बिगड़ती स्थिति की वजह सहिष्णुता ही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही अमरीका में राष्ट्रपति पद के उम्मीद्वारों में से डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद वह एक विशेष समुदाय का अमरीका में प्रवेश बंद करा देंगे। वहां किसी ने उसका विरोध नहीं किया, भारत में यदि कोई ऐसा बयान दे देता तो उसे साम्प्रदायिक, असहिष्णु कहा जाता। देश के सुरक्षा व अखंडता के लिए के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। ऐसे में यदि किसी को देश छोड़कर जाना हो तो जाए।

देश की मौजूदा स्थिति के बारे में क्या कहेंगे ?

हमारे समय में देशभक्ति की लहर होती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं है। देश में भ्रष्टाचार बढ़ गया है। अब देश से पहले पैसा है। लोग देशभक्ति भूल गए। चंद नेताओं को छोड़कर अधिकतर नेता बेईमान हैं। वोट बैंक के लिए लोग देश को बेचने को भी तैयार है। गलती करने वाले भी हम ही हैं और सही करने वाले भी हम ही।

मोदी सरकार में क्या सीबीआई की कार्यशैली में कोई बदलाव आया?

किसी भी पार्टी की सरकार में सीबीआई की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आता। कोर्ट ने सीबीआई को स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए कहा था, लेकिन सरकारें सीबीआई से अपना कंट्रोल समाप्त करना नहीं चाहती।
गत वर्षों में सीबीआई ने कोई बड़ा खुलासा नहीं किया ?

सीबीआई खुद क्या कर सकती है? सीबीआई को कोई केस देगा तो वह जांच करेगी। सीबीआई को या तो सरकार केस देती है या फिर कोर्ट आदेश देता है। सीबीआई सरकार और कोर्ट पर निर्भर है।
देश में बढ़ते आंतकवाद को कैसे रोका जा सकता हैं?

आतंकवाद पर पाकिस्तान को कोसना जायज नहीं हैं। आतंकवाद को समाप्त करने के लिए किसी भी सरकार की इच्छाशक्ति नहीं है। आज तक किसी भी सरकार ने बीएसएफ को सीमा पार करने वाले लोगों को गोली मारने के निर्देश नहीं दिए। आतंकवादी को सुरक्षा एजेंसियां पकड़ती है और बाद में वे छूट जाते हैं। ऐसे लोगों को सपोर्ट करने वालों को भी बराबर की सजा मिलनी चाहिए। (राजस्थान पत्रिका)

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