हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित छात्र रोहित वेमुला के न्याय की लड़ाई लड़ने वाले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के दलित छात्र मुथूकृष्णन जीवानंदम उर्फ रजनी कृष का शव एक दोस्त के घर पर पंखे लटकता हुआ मिला. पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है लेकिन ये भी कह रही है कि उसे कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है.

दिल्ली पुलिस में अतिरिक्त डीसीपी चिन्मय बिस्वाल ने बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय को बताया सोमवार शाम पांच बजे पीसीआर कॉल आई थी. कॉल के बाद पुलिस टीम मुनिरिका विहार के एक घर पहुंची. मौके पर पहुंची पुलिस को एक कमरा अंदर से बंद मिला. पुलिस जब दरवाज़ा तोड़कर अंदर घुसी तो शव पंखे से लटकता मिला. उन्होंने बताया, अभी तक हमें लग रहा है कि ये निजी कारण से आत्महत्या का मामला है. हमें कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. अभी इसे यूनिवर्सिटी से जोड़कर देखने का कोई कारण हमारे पास नहीं है.

रजनी कृष तमिलनाडु के सलेम जिले के रहने वाला था. अपने आखिरी फेसबुक पोस्ट में उन्होंने असमानता की बात की थी. 10 मार्च को लिखे गए पोस्ट में उन्होंने लिखा है, एमफिल/पीएचडी प्रवेश में कोई समानता नहीं है. वाइवा में कोई समानता नहीं है. यहां केवल समानता का खंडन है. प्रोफेसर सुखदेव थोरट की सिफारिश से इनकार करते हैं, एड ब्लॉक में छात्रों के विरोध नकारते हैं, मार्जिनल की शिक्षा को नकारते हैं. जब समानता से इनकार किया जाता है तो सब कुछ वंचित हो जाता है.

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रजनी ने पिछले साल अपने ब्लॉग पर वेमुला की मां राधिका पर एक लेख लिखा था. रजनी कृश की मौत पर प्रतिक्रिया देते हुए जेएनयू छात्र सुयश सुप्रभ ने एक फेसबुक पोस्ट कर लिखा कि रजनी कृश की सांस्थानिक हत्या हुई है. उनकी आत्महत्या जिन परिस्थितियों में हुई है उसपर ध्यान नहीं दिया गया तो किसानों की आत्महत्याओं वाला भारत बहुत जल्द विद्यार्थियों की आत्महत्याओं के लिए जाना जाएगा.

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