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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलपति का शिक्षकों की और से जमकर विरोध हो रहा है। 93 फीसदी शिक्षक कुलपति के विरोध में है। इन शिक्षकों ने बाकायदा कुलपति को हटाने के लिए वोट भी किया है।

जेएनयू शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने एक बयान में कहा कि बाहरी पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजर्स) की निगरानी में हुआ यह जनमत संग्रह बताता है कि वर्तमान कुलपति को अपने पद पर नहीं रहना चाहिए।

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वोटिंग के दौरान शिक्षकों से दो सवाल किए गए थे -पहला, क्या जेएनयू के कुलपति को अपना पद छोड़ देना चाहिए? दूसरा, क्या जेएनयू को हायर एजुकेशन फंडिंग एजेंसी (एचईएफए) लोन लेना चाहिए?

जेएनयूटीए ने कहा, ‘जेएनयू शिक्षकों के 93 फीसदी हिस्से ने कुलपति के विरोध में मतदान किया। जेएनयू के 586 सूचीबद्ध शिक्षकों में से 300 शिक्षक वोट डालने पहुंचे। उनमें से 279 ने कुलपति को हटाए जाने के पक्ष में वोट डाला। आठ वोट अवैध घोषित किया गया और पांच वोट रोक दिए गए थे।’

दूसरे सवाल के जवाब में 288 लोगों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के एचईएफए लोन लेने के ख़िलाफ़ वोट किया और चार लोगों ने इसके पक्ष में वोट किया। इनमें से पांच वोट अवैध थे और तीन वोटों को रोक दिया गया। इसके अलावा 96 प्रतिशत शिक्षक हायर एजुकेशन फंडिंग एजेंसी (एचईएफए) से करोड़ों रुपये का लोन लिए जाने के खिलाफ हैं।

बता दें कि जनमत संग्रह ऐसे समय आया है जब आज (आठ अगस्त) ही जेएनयू में 46 साल बाद दीक्षांत समारोह को आयोजन किया जा रहा है। समारोह के मुख्य अतिथि नीति आयोग के सदस्य और वैज्ञानिक वीके सारस्वत हैं।

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