दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने जेएनयू की एक महिला प्रोफेसर की शिकायत पर यूनिवर्सिटी प्रशासन को नोटिस भेजा है। महिला प्रोफेसर ने मुस्लिम होने के कारण उसे परेशान किए जाने की शिकायत की है। हालांकि, जेएनयू के अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार किया है।

डीएमसी ने कहा कि जेएनयू में एक प्रफेसर ने जेएनयू प्रशासन, विशेषकर सामाजिक बहिष्कार और समावेशी नीति अध्ययन केंद्र के निदेशक द्वारा क्रमबद्ध तरीके से उत्पीड़न की शिकायत की है। इसे लेकर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को नोटिस और अंतरिम आदेश जारी किए गए हैं।

उसने कहा कि प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि यह जेएनयू के कुलपति की सहमति से हो रहा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उसके मुसलमान होने के कारण उसे परेशान किया जा रहा है ताकि उसे संस्थान से बाहर निकाला जा सके।

महिला प्रोफेसर ने अपनी बात साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत दिए हैं। उनकी सैलरी अप्रैल महीने से बिना कारण बताए बंद कर दी गई है। उन्हें क्लासेज नहीं लेने दी जा रही हैं और न किसी एम.फिल या पीएचडी स्टूडेंट को सुपरवाइज करने दिया जा रहा है। यहां तक कि उन्हें ऑफीशियल ईमेल आईडी भी नहीं इस्तेमाल करने दी जा रही है।

साल 2013 में जेएनयू ज्वाइन करने से पहले महिला प्रोफेसर हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में चार साल काम कर चुकी हैं। इससे पहले भी उनकी एक बार सैलरी रोकी जा चुकी है, तब उन्हें हाईकोर्ट जाना पड़ा था।

उनका कहना है कि यह सब इसलिए किया जा रहा है, जिससे वो युनिवर्सिटी छोड़ दें। उन्होंने अल्पसंख्यक आयोग को बताया कि प्रताड़ना का स्तर इतना बढ़ चुका है कि कई बार आत्महत्या के बारे में भी सोच चुकी हैं।

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