jamat e islami

पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर के बहाने बीते कुछ दिनों से दक्षिणपंथी संगठनों के निशाने पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय है. जिन्ना के बहाने AMU की देशभक्ति पर सवाल खड़े किये जा रहे है ताकि पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी पर हुए हमले का मामला ढक जाए.

जमात-ए-इस्लामी हिंद के प्रमुख मौलाना सैयद जलालुद्दीन उमरी ने तिरुवनंतपुरम में संवाददाताओं से कहा, ‘‘ऐसी मांग के पीछे क्या औचित्य है? क्योंकि यह पिछले 80 साल से लोगों की नजर में है. फिर भी किसी की ऐसी मांग है तो उसे अदालत जाना चाहिए। इस पर विवाद क्यों?’’

यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर को एक मामूली मुद्दा बताते हुए उमरी ने कहा कि इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है.उन्होंने कहा कि एएमयू की यह लंबे से अरसे से परंपरा रही है कि वह परिसर में छात्र संघ के आजीवन सदस्यों की तस्वीर लगाता है. उन्होंने कहा कि जिन्ना की तस्वीर 1938 से लगी हुई है. इतने सालों किसी ने भी आपत्ति नहीं जताई या तस्वीर को हटाने की मांग नहीं की.

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jinnah

जमात-ए-इस्लामी हिंद के नेता ने कहा कि यह ऐसा मसला है जिसे छात्र संघ के साथ बातचीत के जरिए हल करने की जरूरत है. उमरी ने भाजपा नीत केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और नागरिकों के मौलिक अधिकार खतरे में है. जमात ने भगवा पार्टी के खिलाफ लड़ने वाली ताकतों का समर्थन किया है.

उमरी ने दावा किया कि भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भी आजादी के संग्राम में जिन्ना की भूमिका पर संदेह नहीं किया है.

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