नई दिल्ली | करीब डेढ़ साल पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर मानहानि का मुकदमा किया था. केजरीवाल की तरफ से मशहूर वकील राम जेठमलानी मुकदमा लड़ रहे है. करीब डेढ़ साल से यह मुकदमा चल रहा है लेकिन सोमवार को यह मामला एक दम से सुर्खियों में आ गया. बीजेपी प्रवक्ता ने केजरीवाल पर आरोप लगाया की वो जनता के पैसो से अपने मुक़दमे लड़ रहे है.

दरअसल राम जेठमलानी ने अरविन्द केजरीवाल के सचिव को करीब साढ़े तीन करोड़ रूपए का बिल भेजा है. इस बिल को चुकाने के लिए उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है. इसी सिलसिले में मंजूरी लेने के लिए फाइल उप राज्यपाल अनिल बीजल को भेजी गयी है. यही से इस मामले पर विवाद शुरू हो गया. बीजेपी ने इसे सरकारी पैसो का दुरूपयोग बताते हुए कहा की कर्म केजरीवाल करेंगे और बिल जनता भरेगी.

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विवाद बढ़ने पर मनीष सिसोदिया ने उल्टा बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा की इवीएम् विवाद से ध्यान भटकाने के लिए यह मुद्दा उठाया गया है. जबकि यह भ्रष्टाचार का मामला है. क्रिकेट में हुए भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए एक कमिटी का गठन किया गया. जिसमे कई बड़े लोग फंस रहे है. इसलिए मानहानि का मुकदमा सीएम् केजरीवाल पर हुआ है . क्योकि उन्होंने जाच करने का आदेश दिया था. यह निजी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा नही किया गया है.

मनीष ने आगे कहा की इसलिए सरकार को इस मुक़दमे की फीस वहन करने के लिए कहा गया. मनीष ने इस मुद्दे को उठाने के समय पर सवाल उठाते हुए कहा की यह मुकदमा पिछले डेढ़ साल से चल रहा है लेकिन इसे अभी इसलिए उठाया गया है की क्योकि सरकार के पास इवीएम् मशीन विवाद पर कहने के लिए कुछ नही है. उधर जेठमलानी ने कहा की अगर केजरीवाल या दिल्ली सरकार उनकी फीस नही देती है तो वो इस मुकदमे को फ्री में लड़ेंगे.

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