Friday, December 3, 2021

क़ुद्स दिवस पर इज़राइली ज़ुल्म के ख़िलाफ़ प्रदर्शन, हज़ारों लोगों ने लिया हिस्सा

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नई दिल्ली: यरूशलम सिर्फ़ फ़िलस्तीनियों का नहीं, यह इस्लाम का घर है। यहाँ इस्लाम की तीसरी सबसे पवित्र जगह मस्जिद अलअक़्सा है और हर मुसलमान का ही नहीं, हर मानववादी का फ़र्ज़ है कि वह यरूशलम और मस्जिद अलअक़्सा पर फ़िलस्तीनियों की भावनाओं की क़द्र करते हुए इज़राइल को इस बात के लिए मजबूर करे कि वह यरूशलम से अपनी अवैध बस्तियों को हटाए। यह बात भारत में सूफ़ी उलेमा के सबसे बड़े संगठन ऑल इंडिया तंज़ीम उलामा ए इस्लाम के संस्थापक अध्यक्ष मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने कही।  वह दिल्ली के शास्त्री पार्क में क़ादरी मस्जिद में शुक्रवार की नमाज़ के बाद ‘अन्तरराष्ट्रीय क़ुद्स दिवस’ पर हज़ारों लोगों की रैली को संबोधित कर रहे थे। तंज़ीम उलामा ए इस्लाम ने भारत में इस मुद्दे पर कई बार बहुत बड़ी रैलियों का आयोजन किया है।

मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने कहाकि अमेरिका, नाटो और अरब के भ्रष्ट वहाबी चरित्रहीन तानाशाहों के बल पर इज़राइल फ़िलस्तीन पर ज़ुल्म कर रहा है जिसे भारत के मुसलमान ने ना कभी बर्दाश्त किया था और ना ही कभी करेगा। क़ादरी ने कहाकि यरूशलम पर क़ब्ज़ा करके इज़राइल यह सपना देख रहा है कि वह मस्जिद अलअक़्सा को मिटा देगा लेकिन सिर्फ़ मुसलमान ही नहीं दुनिया का हर दर्दमंद दिल यह समझ रहा है कि साल 1948 से फ़िलस्तीन पर अवैध क़ब्ज़ा करने वाली ज़ियोनवादी इज़राइली बिरादरी ने आम फ़िलस्तीनियों को बहुत सताया है। मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने कहाकि सऊदी अरब के बेईमान भ्रष्ट वहाबी अलसऊद तानाशाह परिवार और इज़राइल की साँठगाँठ से फ़िलस्तीन को बहुत नुक़सान पहुँचा है और आतंकवाद के प्रसार में दोनों देशों का षड़यंत्र खुल चुका है। बेहतर है कि भारत इससे सबक़ लेकर सचेत रहे और आम फ़िलस्तीनियों के प्रति अपना समर्थन और इज़राइल से अपना विरोध बरक़रार रखे।

मस्जिद अलअक़्सा को बचाएंगे- नक्शबंदी

दरबारे अहले सुन्नत संगठन के पीर सय्यद जावेद अली नक्शबंदी ने बताया कि इज़राइल यरूशलम पर अपने अनैतिक क़ब्ज़े के क्रम में मस्जिद अलअक़्सा को बर्बाद करने पर तुला हुआ है और यह फ़िलस्तीन ही नहीं बल्कि वैश्विक इस्लामी समाज के इतिहास के लिए तीसरा सबसे महत्वपूर्ण स्थल है। उन्होंने कहाकि मस्जिद अलअक़्सा पर पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब ने नमाज़ पढ़वाई है और क़ुरआन में भी मस्जिद अलअक़्सा का ज़िक्र है। यदि आम मुसलमान और आम मानववादी यरूशलम को ज़ियोनवादी ताक़तों से बचाने की बात करता है तो वह मस्जिद अलअक़्सा की सलामती भी चाहता है।

11 हज़ार फ़िलस्तीनियों की रिहाई हो- मुफ़्ती असरार

मुफ़्ती असरार ने कहाकि ज़ियोनवादी भ्रष्ट इज़राइल ने अपनी जेलों में 11 हज़ार बेगुनाह लोगों को जेलों में बन्द कर रखा है जिसकी फ़ौरन रिहाई होनी चाहिए। उन्होंने कहाकि इन क़ैदियों में 14 साल से छोटे बच्चे, महिलाएँ और बेशुमार वृद्ध फ़िलस्तीनी हैं जिन पर कोई गुनाह साबित नहीं होता। उन्होंने कहाकि चोरी और सीनाज़ोरी का इज़राइली फॉर्मूला नहीं चलेगा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और सभी क्षेत्रीय संगठनों से माँग की कि वह अपनी कूटनीतिक और राजनीतिक ताक़त के बल पर फ़िलस्तीनियों की इज़राइल की जेलों से रिहाई का बन्दोबस्त करवाए।

क़ुद्स दिवस का ऐतिहासिक महत्व- शुजात क़ादरी

भारत के सबसे बड़े छात्र संगठन मुस्लिम स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष इंजिनियर शुजात अली क़ादरी ने कहाकि ‘अन्तरराष्ट्रीय क़ुद्स दिवस’ की परम्परा ईरान से चली है और हर रमज़ान के अंतिम शुक्रवार को दुनिया भर में इसका आयोजन किया जाता है। अरबी में क़ुद्स शहर यरूशलम का नाम है। क़ुद्स की स्वतंत्रता के रूप में फ़िलस्तीन पर इज़राइली क़ब्ज़े के विरोध का प्रतीक है। क़ुद्स दिवस हमें याद दिलाता है कि हमें आम फ़िलस्तीनियों के दर्द को भूलना नहीं चाहिए। इज़राइल सभी शांति समझौतों का उल्लंघन करके यरूशलम पर क़ब्ज़ा करना चाहता है क्योंकि ज़ियोनवादियों का वहम है कि यरूशलम पर क़ब्ज़ा होने से वह ग्रेटर इज़राइल बना पाएंगे जिसके लिए वह सपना देखते हैं कि इसमें पूरा फ़िलस्तीन, जॉर्डन, इराक़, मिस्र और सऊदी अरब आता है।

हमारे ज्ञापन को समझें नरेन्द्र मोदी- मौलाना अब्दुल वाहिद

मदरसा गौसुस सक़लैन के प्रिसिपल के मौलाना अब्दुल वाहिद ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू की दोस्ती सब जानते हैं लेकिन मोदीजी हमारे ज्ञापन पर ध्यान दें। हम माँग करते हैं कि यरूशलम की आज़ादी, मस्जिद अलअक़्सा की सुरक्षा, आम फ़िलस्तीनियों पर ज़ियोनवादी इज़राइल के ज़ुल्म से निजात, इज़राइली जेलों में बन्द बेकसूर 11 हज़ार फ़िलस्तीनियों की रिहाई, फ़िलस्तीनी शरणार्थियों को अपने घर में सुरक्षित वापसी, फ़िलस्तीन में अवैध इज़राइली बस्तियों को हटाने, नस्लभेदी इज़राइली दीवार को तोड़ने, आम लोगों और फ़िलस्तीनी नेताओं की हत्या रोकने एवं हत्याओं की संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में जाँच, इन हत्याओं के एवज़ में अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय में सुनवाई और दोषी इज़राइली सरकार एवं सेना पर फौजदारी कार्रवाई के लिए भारत इज़राइल के विरुद्ध अपना पक्ष संयुक्त राष्ट्र में रखे।

हज़ारों लोग, भारत-फ़िलस्तीन ज़िन्दाबाद के नारे

शास्त्री पार्क की सबसे बड़ी क़ादरी मस्जिद में यूँ तो शुक्रवार की नमाज़ के लिए आम तौर पर हज़ारों नमाज़ी आते हैं लेकिन रमज़ान के अंतिम शुक्रवार की नमाज़ में यह संख्या चार गुनी हो जाती है। नमाज़ के बाद फ़िलस्तीन के पक्ष में हुए प्रदर्शन में क़रीब दस हज़ार लोग जमा हो गए और भारत और फ़िलस्तीन ज़िन्दाबाद के नारे लगाने लगे। लोगों ने इज़राइल मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए मंचासीन नेताओं की मंशा पर समर्थन दिखाया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से बुलंद मस्जिद के इमाम कारी रफीक नूरी, फरूके अजं मस्जिद के इमाम मौलाना असरारुल हक, इमाम मुफ़्ती इश्तियाक कादरी, मदरसा साबरिया के कारी फुरकान, गौसिया मस्जिद के मौलाना अब्बास, मस्जिद रज़ा के मुफ़्ती इकबाल मिस्बाही, मदरसा नूरुल कुरान के मौलाना मुहम्मद आलम, मदरसा गुलशने इस्लाम के मौलाना मुस्तक़ीम, जमा मस्जिद करदम पूरी के मौलाना कामिल रज़ा, जाफराबाद के मौलाना फिरदौस व मौलाना मेराज, सीलमपुर के कारी शम्स व मौलाना अनवर, खजुरी के मौलाना गुलाम मुहम्मद, मौलाना शाबान व कारी मोईनुद्दीन, कादरी मस्जिद के कारी जमशेद व जाहिद रज़ा, मदरसा सक़लैन के कारी फहीम और कारी सलीम सहित हज़ारों लोग मौझुद रहे.

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